मांग और आपूर्ति के बीच झूल रही हैं ऑटो कंपनियां, बस अब गांव-कस्बों का ही सहारा!
- अर्थव्यवस्था की बुनियाद है मांग और आपूर्ति।
- 30 से 50 फीसदी तक डीलरशिप खुलीं
- पैंडिंग ऑडर्स की डिलीवरी के बाद मांग का इंतजार
- वित्त वर्ष 2019-20 में कुल बिक्री का 38.5 फीसदी ग्रामीण भारत से
विस्तार
अर्थव्यवस्था की बुनियाद है मांग और आपूर्ति। अगर इन दोनों में असुंतलन पैदा हो जाए तो अर्थव्यवस्था किस हाल में है, इसका अंदाजा लगाने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। इन दिनों ऑटो कंपनियां मांग और आपूर्ति में उलझ कर रह गई हैं। ग्रीन जोन में लॉकडाउन खुलने के बाद कई ऑटो डीलरशिप ने अपने शोरूम तो खोल लिए, लेकिन उन्हें भी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
30 से 50 फीसदी तक डीलरशिप खुलीं
मारुति सुजुकी, ह्यूंदै, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टोयोटा, किआ, टाटा मोटर्स, हीरो मोटोकॉर्प, बजाज ऑटो की अभी तक 30 से 50 फीसदी तक डीलरशिप खुल चुकी हैं। लेकिन कारों की बिक्री को लेकर उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। संक्रमण और जिला स्तर पर निर्धारित गाइडलाइंस के बीच अपनी गाड़ियां बेचने के लिए वे ग्राहकों की बाट जोह रही हैं। कम से कम इतने ग्राहक तो चाहिए ही, ताकि कंपनियां गाड़ियों के प्रोडक्शन को चालू रख सकें। इस सामंजस्य को बिठाने के लिए कंपनियों और डीलरशिप को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं।
डिलीवरी हुई शुरू
लॉकडाउन से पहले जो गाड़ियों की बुकिंग मिली थीं, उनमें से कई कैंसिल हो चुकी हैं, बावजूद इसके कंपनियों के लिए संतोष की बात यह है कि डिलीवरी हो पा रही हैं। मारुति सुजुकी अभी तक 2300 गाड़ियां, ह्यूंदै 2200, टोयोटा 200 गाड़ियों की डिलीवरी कर चुकी हैं। दोपहियां वाहनों की बात करें तो पहले हफ्ते में ही हीरो मोटोकॉर्प 10 हजार यूनिट्स और शुक्रवार तक होंडा टूव्हीलर्स 21 हजार गाड़ियों की बिक्री कर चुकी है।
भविष्य से खौफजदा
पिछले साल के आंकड़ों पर भरोसा करें तो हीरो मोटोकॉर्प ने 70 से 80 वाहनों की बिक्री की थी, वहीं मारुति सुजुकी ने 2019 में 15 लाख गाड़ियों की बिक्री की थी। वहीं अब कंपनियों को चिंता सता रही है कि पैंडिंग ऑडर्स की डिलीवरी के बाद भविष्य में मांग कितनी रहने वाली है। ऑटो कंपनियों की अनिश्चितता बरकरार है, उन्हें डर है कि कहीं भविष्य में शोरूम्स बंद करने की नौबत न आ जाए।
कई राज्यों में अभी भी लॉकडाउन
वहीं ज्यादा बिक्री वाले राज्यों केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु अभी भी लॉकडाउन से जूझ रहे हैं। इसके अलावा राजस्थान, आंध्रप्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब में भी हालात बहुत बेहतर नहीं है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े मैट्रो सिटीज भी अभी तक खुले नहीं है और वहां व्यवसायिक गतिविधियां बंद पड़ी हैं। महाराष्ट्र, तेलंगाना समेत कई राज्यों ने लॉकडाउन को आगे भी बढ़ा दिया है। कंपनियों को उम्मीद की किरण अब ग्रामीण इलाकों से ही दिखाई दे रही है।
ग्रामीण इलाकों की हिस्सेदारी बढ़ी
वित्त वर्ष 2019-20 में मारुति सुजुकी की कुल बिक्री का 38.5 फीसदी हिस्सा देश के ग्रामीण इलाकों से आया था। जो तकरीबन एक दशक पहले 9 से 10 फीसदी के बीच था। वहीं कंपनी को उम्मीद है कि लॉकडाउन खुलने के बाद ग्रामीण इलाकों से बिक्री में उछाल देखने को मिल सकता है। हाल ही में मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने भी माना था कि मौजूदा वक्त में खुली डीलरशिप तकरीबन 60 फीसदी ग्रामीण इलाकों से हैं। वर्तमान में मारुति के पूरे देश में 2500 से ज्यादा टचपाइंट्स हैं, वहीं लॉकडाउन के दौरान कंपनी को पांच हजार से ज्यादा बुकिंग्स मिल चुकी हैं औक पैंडिंग ऑडर्स में से कंपनी ने 2300 गाड़ियों की डिलीवरी की है।