क्या बॉलीवुड सितारों की गाड़ियों पर लगे शीशों की भी जांच होनी चाहिए? ये है वजह
सुशांत सिंह राजपूत केस में ड्रग्स कनेक्शन सामने आने के बाद से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) लगातार बॉलीवुड के कई स्टार्स से लगातार पूछताछ कर रही है। इसी कड़ी में दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह जैसी अभिनेत्रियों को भी ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए एनसीबी बुला रही है। ऐसे में एक सवाल यह भी है कि क्या इन सितारों के कार के शीशों की भी जांच करना चाहिए? यह सवाल इसलिए क्योंकि मुंबई में कई बॉलीवुड सेलिब्रिटियों की कारों में टिंटेड शीशे लगे हैं। अब ये शीशें नियमों का पालन करते हैं या नहीं यह पता लगाना थोड़ा मुश्किल है। मुश्किल क्यों है, यह भी हम आपको बताएंगे और यह भी बताएंगे कि नियमों को तोड़ने पर कितना फाइन देना होगा।
गाड़ी के शीशों को लेकर क्या है नियम?
केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत गाड़ियों के दरवाजों और विंडस्क्रीन पर काले या डार्क शीशे लगाना मना है। हालांकि, शीशों की विजिबिलिटी को लेकर कुछ मानक तय किए गए हैं। नियम के मुताबिक कार के दरवाजों के शीशे की विजिबिलिटी 50 फीसदी होनी चाहिए। जबकि, सामने और पीछे के शीशों की विजिबिलिटी 70 फीसदी होनी चाहिए।
शीशे की विजिबिलिटी कैसे नापें?
कार के शीशों की विजिबिलिटी को नापने का एक ही तरीका है कि फिल्म पर लिखे गए विजिबिलिटी प्रतिशत को देखा जाए। यही कारण है कि कई लोग इसी का फायदा उठा कर बच जाते हैं।
दरअसल कार के शीशो पर लगाए जाने वाले फिल्म पर विजिबिलिटी का प्रतिशत लिखा होता है। लेकिन लोकल फिल्म पर आपको यह नहीं दिखाई देगा। ऐसे में हो सकता है कि जिस फिल्म को आप लगवाएं वो तय प्रतिशत से ज्यादा हो। लेकिन इसे चेक करने के लिए पुलिस को गाड़ी को रोकना होगा।
कितने रुपये का है जुर्माना?
केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 177 के तहत तय सीमा से ज्यादा शाशे के डार्क होने पर 100 रुपये का जुर्माना था। लेकिन मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 की तरफ से संशोधित दंड सूची के बाद, इसे बढ़ाकर 25 गुना कर दिया गया है। अब तय सीमा को पार करने पर 2500 रुपये का जुर्माना है।
टिंटेड ग्लास से क्या है परेशानी?
अगर गाड़ी में लगे ग्लास की विजिबिलिटी केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 की तय सीमा के अंदर है, तो फिर परेशानी की कोई बात नहीं है। लेकिन अगर यह तय सीमा से ज्यादा है, तो यह गैरकानूनी काम में गिना जाएगा। दरअसल कार के शीशे की विजिबिलिटी अगर तय सीमा से ज्यादा हुई, तो बाहर के शख्स को कार के अंदर की चीजें दिखाई नहीं देगी। इससे अगर कार के अंदर कोई भी गैरकानूनी काम हो रहा है, तो किसी को पता नहीं चल सकेगा। बदमाश अक्सर ऐसे शीशों का इस्तेमाल करके अपहरण के वारदात को अंजाम देते हैं।
क्यों इस्तेमाल करते हैं टिंटेड ग्लास?
- सेलिब्रिटीज अपनी गाड़ियों में प्राइवसी के कारण टिंटेड ग्लास का इस्तेमाल करते हैं। नॉर्मल शीशे के मुकाबले इसकी विजिबिलिटी कम होती है।
- टिंटेड ग्लास लगी गाड़ी देखने में अच्छी लगती हैं। कई जगहों पर इसे स्टेटस सिंबल के तौर पर भी देखा जाता है।
- टिंटेड ग्लास को लगाने के पीछे की एक सोच यह भी रहती है कि इससे गाड़ी के अंदर गर्मी कम होती है। दरअसल नॉर्मल ग्लास के मुकाबले टिंटेड ग्लास सूरज की तेज किरणों को ज्यादा रोकते हैं। इससे गाड़ी तेजी से गर्म नहीं होती है। हालांकि, बाजार में अब ट्रांसपेरेंट फिल्म भी उपलब्ध हैं, जो काली फिल्म के मुकाबले गाड़ी को ज्यादा ठंडी रखती हैं।
- टिंटेड ग्लास की विजिबिलिटी कम होती है, जिससे गाड़ी के अंदर रखे सामान को देखना उतना आसान नहीं होता है। ऐसे में कई लोग गाड़ी में रखे सामान को चोरों से बचाने के लिए टिंटेड ग्लास का इस्तेमाल करते हैं।