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अगले साल से जरूरी होगा वाहनों में एबीएस, जानें क्या हैं इसकी खूबी

Tue, 04 Sep 2018 11:13 AM IST
ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 04 Sep 2018 11:13 AM IST
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abs will be mandatory in vehicles from next month
कार का एबीएस कुछ इस तरह से काम करता है।

आज से लगभग 40 साल पहले आॅटो मोबाइल जगत में ऐसी तकनीक का अविष्कार हुआ जिसने आॅटोमोबाइल जगत की परिभाषा ही बदल कर रख दी। उस समय दुनिया में पहली बार 'एंटी स्लीपिंग' सिस्टम का प्रयोग किया गया जिसे आज एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम यानी की एबीएस के नाम से जाना जाता है। लोगों का मानना है कि एबीएस कार की गति को कम करता है लेकिन असलियत कुछ और ही है। दरअसल एबीएस कार को धीमा करने की बजाय कार को बेहतर ढंग से चलाने में अधिक मदद करता है।

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कैसे काम करता है एबीएस
यदि आप ऐसा मानते हैं कि एबीएस बस आपके वाहन के पूरे ब्रेकिंग सिस्टम को दुरुस्त करता है तो आपकी ये जानकारी पूर्ण नहीं है। दरअसल, एबीएस बस कार के पहियों को लॉक होने से बचाता है। हालांकि एक एबीएस सिस्टम से लैस कार ब्रेकिंग के दौरान पूरी तरह से रुकने के लिए एक सामान्य कार की तुलना में ज्यादा जगह चाहती है, लेकिन एबीएस सिस्टम कार के पहियों को वो ग्रीप प्रदान करता है कि वो तयशुदा समय पर आसानी से रूक जाती हैं।
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चाहे इसकी कंडीशन कोई भी हो यदि आपके कार का पहिया भीगा हो या फिर कुछ भी, एबीएस सिस्टम कार को पहियों के गीला होने के दौरान भी बेहतर ग्रीप प्रदान करता है और उसे एक ड्राय व्हील की ही तरह परफार्म करने के लिए बाध्य करता है। ये सभी जानते हैं कि, भीगे हुए पहियों के लॉक होने की संभावनायें ज्यादा होती हैं।

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क्यों है जरुरी
यदि ड्राइविंग के दौरान आपकी कार का पहिया हाई ब्रेकिंग प्रेशर के चलते लॉक हो जाता है। उस दशा में आपकी कार एक सीधी लाइन पर आगे बढ़ती है लेकिन कार का पहिया लॉक होने के नाते वाहन चालक का नियंत्रण स्टीयरिंग व्हील पर कम हो जाता है। ऐसी स्थिती में यदि कार में एबीएस तकनीकी मौजूद हो तो वो कार के पहियों को एक नियंत्रित स्थिती में ब्रेक प्रदान करता है जिसके चलते कार का चालक स्टीयरिंग व्हील पर अपना नियंत्रण वापस प्राप्त कर लेता है और किसी भी तरह के आपात स्थिती से आसानी से बच सकता है।

सबसे पहले कब हुआ प्रयोग
सबसे पहली बार इस सिस्टम का प्रयोग ट्रेन और एविएशन इंडस्ट्री में किया गया था। 50 के दशक में रॉयल एयरफोर्स के फाइटर प्लेन और कुछ डीजल लोकोमोटिव्स में भी इस सिस्टम का प्रयोग किया गया था। यह वो समय था जब आॅटोमोबाइल जगत में अविष्कारों का दौर था उस वक्त सन 1978 में पहली बार मर्सडीज बेंज एस क्लॉस में फोर व्हील मल्टी चैनल का प्रयोग किया गया। इस प्रयोग ने कारों में इस बेहतरीन ब्रेकिंग सिस्टम के इस्तेमाल का रास्ता खोल दिया। ये सिस्टम बोस और डैमलर द्वारा बनाया गया था। 

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