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Vastu Tips: घर के ईशान कोण में मौजूद वास्तु दोष से हो सकते हैं गंभीर रोग, करें उपाय
Sat, 13 Apr 2024 09:37 AM IST
विनोद शुक्ला
शैली प्रकाश
शैली प्रकाश
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 13 Apr 2024 09:37 AM IST
सार
उत्तर और पूर्व के बीच की दिशा को ईशान कोण कहते हैं। ईशान कोण जल एवं भगवान शिव का स्थान है और गुरु ग्रह इस दिशा के स्वामी है।
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vastu tips: उत्तर और पूर्व के बीच की दिशा को ईशान कोण कहते हैं।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
घर में किचन, टॉयलेट या शयनकक्ष किस दिशा में है, इन सबका हमारे शरीर, मन और मस्तिष्क पर नकारात्मक या सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। घर की ईशान दिशा सबसे पवित्र होती है। पूर्व और उत्तर के बीच की दिशा को ईशान दिशा कहते हैं। यहां पर यदि वास्तु दोष होता है तो यह गंभीर रोग का कारण बन सकता है। आप भी जानिए कि आप किस तरह गंभीर रोग से बच सकते हैं।
उत्तर और पूर्व के बीच की दिशा को ईशान कोण कहते हैं। ईशान कोण जल एवं भगवान शिव का स्थान है और गुरु ग्रह इस दिशा के स्वामी है। ईशान कोण में पूजा घर, मटका, कुंवा, बोरिंग वाटर टैंक स्थान बना सकते हैं, लेकिन अन्य कोई कुछ निर्मित कर रखा है तो वास्तु दोष होगा।
ईशान में किचन : यदि उत्तर पूर्व यानी ईशान दिशा में किचन है तो कैंसर या कोई असाध्य रोग होगा। ईशान कोण जल तत्व यानी चंद्र की दिशा है और यदि यहां किचन होगा तो अग्नि का काम होता रहेगा। अग्नि और जल का कभी मिलन नहीं होता है। यदि यहां किचन है तो इसका कोई उपाय नहीं है लेकिन फिर भी फौरी तौर पर आप गैस स्टोव के नीचे हरे रंग का एक रेक्टेंगल फर्शी रख दें या हरे रंग का कोई कारपेट लगाकर उसके ऊपर स्टोव या चूल्हा रखें।
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टॉयलेट : यदि ईशान कोण में टॉयलेट बना है तो इसे एक गंभीर वास्तु दोष माना जाता है। टॉयलेट राहु का कारक है और यदि यह गुरु की ईशान दिशा में है तो गुरु चांडाल योग बनेगा जो गंभीर रोग को जन्म देगा। इसका फल रहने वाले व्यक्ति को 10 साल के भीतर मिल जाता है। ऐसे घर में जन्म लेने वाला बालक शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो सकता है। शौचालय ईशान कोण में बन गया है तो फिर यह बहुत ही धनहानि और अशांति का कारण बन जाता है। इस दिशा में शौचालय है तो वैसे तो इसका कोई उपाय नहीं है लेकिन फौरी तौर पर आप टॉयलेट के चारों ओर भूमि पर नीले रंग की पट्टी या टेप लगा दें।
बाथरूम : बाथरूम कभी की ईशान या दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। इससे घटना दुर्घटना के योग बनते हैं। ईशान में हैं तो बाथरूम के चारों ओर भूमि पर नीले रंग की पट्टी या टेप लगा दें। दक्षिण में है तो लाल रंग की पट्टी या टेप लगा दें।
स्टोर रूम : ईशान कोण में स्टोर रूम हो तो मुखिया घूमने फिरने में अधिक खर्च करता है। उसके माता पिता अधिक दान-पुण्य करने वाले होते हैं। वास्तु शास्त्र के प्रमुख ग्रंथ विश्वकर्मा प्रकाश में अनुसार ‘पूर्वम स्नान मंदिरम’अर्थात भवन के पूर्व दिशा में स्नानगृह होना चाहिए।
सेप्टिक टैंक : इस दिशा में सेप्टिक टैंक होना बहुत ही घातक है। यह कर्ज, रोग के साथ मौत का कारण भी बन सकता है। इसका कोई उपाय नहीं है। इसे हटा देना चाहिए।
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उत्तर और पूर्व के बीच की दिशा को ईशान कोण कहते हैं। ईशान कोण जल एवं भगवान शिव का स्थान है और गुरु ग्रह इस दिशा के स्वामी है। ईशान कोण में पूजा घर, मटका, कुंवा, बोरिंग वाटर टैंक स्थान बना सकते हैं, लेकिन अन्य कोई कुछ निर्मित कर रखा है तो वास्तु दोष होगा।
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ईशान में किचन : यदि उत्तर पूर्व यानी ईशान दिशा में किचन है तो कैंसर या कोई असाध्य रोग होगा। ईशान कोण जल तत्व यानी चंद्र की दिशा है और यदि यहां किचन होगा तो अग्नि का काम होता रहेगा। अग्नि और जल का कभी मिलन नहीं होता है। यदि यहां किचन है तो इसका कोई उपाय नहीं है लेकिन फिर भी फौरी तौर पर आप गैस स्टोव के नीचे हरे रंग का एक रेक्टेंगल फर्शी रख दें या हरे रंग का कोई कारपेट लगाकर उसके ऊपर स्टोव या चूल्हा रखें।
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टॉयलेट : यदि ईशान कोण में टॉयलेट बना है तो इसे एक गंभीर वास्तु दोष माना जाता है। टॉयलेट राहु का कारक है और यदि यह गुरु की ईशान दिशा में है तो गुरु चांडाल योग बनेगा जो गंभीर रोग को जन्म देगा। इसका फल रहने वाले व्यक्ति को 10 साल के भीतर मिल जाता है। ऐसे घर में जन्म लेने वाला बालक शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो सकता है। शौचालय ईशान कोण में बन गया है तो फिर यह बहुत ही धनहानि और अशांति का कारण बन जाता है। इस दिशा में शौचालय है तो वैसे तो इसका कोई उपाय नहीं है लेकिन फौरी तौर पर आप टॉयलेट के चारों ओर भूमि पर नीले रंग की पट्टी या टेप लगा दें।
बाथरूम : बाथरूम कभी की ईशान या दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। इससे घटना दुर्घटना के योग बनते हैं। ईशान में हैं तो बाथरूम के चारों ओर भूमि पर नीले रंग की पट्टी या टेप लगा दें। दक्षिण में है तो लाल रंग की पट्टी या टेप लगा दें।
स्टोर रूम : ईशान कोण में स्टोर रूम हो तो मुखिया घूमने फिरने में अधिक खर्च करता है। उसके माता पिता अधिक दान-पुण्य करने वाले होते हैं। वास्तु शास्त्र के प्रमुख ग्रंथ विश्वकर्मा प्रकाश में अनुसार ‘पूर्वम स्नान मंदिरम’अर्थात भवन के पूर्व दिशा में स्नानगृह होना चाहिए।
सेप्टिक टैंक : इस दिशा में सेप्टिक टैंक होना बहुत ही घातक है। यह कर्ज, रोग के साथ मौत का कारण भी बन सकता है। इसका कोई उपाय नहीं है। इसे हटा देना चाहिए।