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Kitchen Vastu Tips: किचन में इस तरह के वास्तु दोष होने पर बनता है आत्महत्या के योग, जानें समाधान
Tue, 16 Apr 2024 12:32 PM IST
विनोद शुक्ला
शैली प्रकाश
शैली प्रकाश
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 16 Apr 2024 12:32 PM IST
सार
किचन एक ऐसा स्थान है जहां पर प्रतिदिन सुबह और शाम को अग्नि प्रज्वलित होती रहती है। जिस जगह पर निरंतर अग्नि जलती है वहां पर अग्नि मंडल निर्मित होने लगता है। इस मंडल का समय के साथ घनत्व और विस्तार होता रहता है।
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किचन के सामने, ऊपर या नीचे शयनकक्ष क्यो नहीं होना चाहिए?
- फोटो : istock
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विस्तार
Vastu Shastra: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में किचन आग्नेय कोण में शुभ माना जाता है। दूसरा इसे पश्चिम में भी उपाय के साथ बना सकते हैं, लेकिन यदि किचन किसी भी दिशा या कोण में बना हो और उसी के सामने, उसके ठीक ऊपर की मंजिल पर या नीचे की मंजिल पर शयनकक्ष हो तो यह गंभीर वास्तु दोष निर्माण करेगा।
किचन के सामने, ऊपर या नीचे शयनकक्ष क्यो नहीं होना चाहिए?
किचन एक ऐसा स्थान है जहां पर प्रतिदिन सुबह और शाम को अग्नि प्रज्वलित होती रहती है। जिस जगह पर निरंतर अग्नि जलती है वहां पर अग्नि मंडल निर्मित होने लगता है। इस मंडल का समय के साथ घनत्व और विस्तार होता रहता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यह करीब 10 फीट से लेकर 12 फीट तक विस्तारित हो जाता है। इस अग्नि ऊर्जा का प्रभाव किचन के सामने, नीचे और ऊपर के रूम पर पड़ता है। सामने चाहे शयनकक्ष हो, स्टडी रूम हो, पूजा घर हो या फिर वॉशरूम हो सभी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। खासकर शयनकक्ष पर इसलिए ज्यादा प्रभाव रहता है क्योंकि व्यक्ति वहां 6 से 8 घंटे तक सोता है।
क्या होता है इससे नुकसान?
आत्महत्या के विचार हो जाते हैं प्रबल : अधिक समय तक अग्नि मंडल के प्रभाव क्षेत्र में रहने, सोने या पढ़ाई करने से मानसिक बेचैनी बढ़ जाती है। अकारण ही क्रोध आता है। हर छोटी असफलता भी डिप्रेशन का कारण बनने लगती है। यह अनावश्यक तनाव के चलते व्यक्ति आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है। जातक क्रोध में पागल जैसा हो जाता है।
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शारीरिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं : इस अग्नि मंडल के कारण व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर, अनिद्रा, नसों की कमजोरी के साथ ही जोड़ों का दर्द और पित्त का असंतुलन जैसी समस्या होने लगती है। व्यक्ति हमेशा थका थका महसूस करता है।
अन्य नुकसान : उपरोक्त सभी नुकसान के चलते गृह क्लेश, लड़ाई झगड़ा, धन हानि, कानूनी विवाद, एक्सीडेंट और अचानक से होने वाली घटनाएं भी जन्म लेने लगती हैं।
किचन के ऊपर शयनकक्ष का उपाय:
ऊपर के बेडरूम के लिए उपाय- किचन की छत कम से कम 15 फीट ऊंची रखें। इससे ऊपर के बेडरूम में ऊर्जा का प्रभाव कम रहेगा। किचन की छत पर पीओपी या थर्माकोल की शीट लगवा लें।
किचन के सामने के शयनकक्ष का उपाय- किचन और शयनकक्ष की बीच की छत पर एक विंड चेम लटका दें। शयनकक्ष का दरवाजे पर मोटे कपड़े का पर्दा लगाकर रखें।
किचन के नीचे के शयनकक्ष के लिए उपाय- किचन के गैस स्टोव के नीचे हरे रंग की एक मैट बिछा लें। किचन का काम हो जाने के बाद किचन को अच्छे से धो लें। किचन के फर्श पर गीला पोछा लगाएं।
अन्य उपाय : किचन में 2 एग्जॉस्ट फैन लगाएं जो किचन में काम करते वक्त और उसके बाद 1 घंटे तक चलता रहे। किचन में गैस स्टोव के ऊपर ऐसी चिमनी लगाएं जो सारी गर्मी खींचकर बाहर निकाल दें। जिसका धुंआ और अग्नि बाहर निकल जाए।
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किचन के सामने, ऊपर या नीचे शयनकक्ष क्यो नहीं होना चाहिए?
किचन एक ऐसा स्थान है जहां पर प्रतिदिन सुबह और शाम को अग्नि प्रज्वलित होती रहती है। जिस जगह पर निरंतर अग्नि जलती है वहां पर अग्नि मंडल निर्मित होने लगता है। इस मंडल का समय के साथ घनत्व और विस्तार होता रहता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यह करीब 10 फीट से लेकर 12 फीट तक विस्तारित हो जाता है। इस अग्नि ऊर्जा का प्रभाव किचन के सामने, नीचे और ऊपर के रूम पर पड़ता है। सामने चाहे शयनकक्ष हो, स्टडी रूम हो, पूजा घर हो या फिर वॉशरूम हो सभी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। खासकर शयनकक्ष पर इसलिए ज्यादा प्रभाव रहता है क्योंकि व्यक्ति वहां 6 से 8 घंटे तक सोता है।
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क्या होता है इससे नुकसान?
आत्महत्या के विचार हो जाते हैं प्रबल : अधिक समय तक अग्नि मंडल के प्रभाव क्षेत्र में रहने, सोने या पढ़ाई करने से मानसिक बेचैनी बढ़ जाती है। अकारण ही क्रोध आता है। हर छोटी असफलता भी डिप्रेशन का कारण बनने लगती है। यह अनावश्यक तनाव के चलते व्यक्ति आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है। जातक क्रोध में पागल जैसा हो जाता है।
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शारीरिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं : इस अग्नि मंडल के कारण व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर, अनिद्रा, नसों की कमजोरी के साथ ही जोड़ों का दर्द और पित्त का असंतुलन जैसी समस्या होने लगती है। व्यक्ति हमेशा थका थका महसूस करता है।
अन्य नुकसान : उपरोक्त सभी नुकसान के चलते गृह क्लेश, लड़ाई झगड़ा, धन हानि, कानूनी विवाद, एक्सीडेंट और अचानक से होने वाली घटनाएं भी जन्म लेने लगती हैं।
किचन के ऊपर शयनकक्ष का उपाय:
ऊपर के बेडरूम के लिए उपाय- किचन की छत कम से कम 15 फीट ऊंची रखें। इससे ऊपर के बेडरूम में ऊर्जा का प्रभाव कम रहेगा। किचन की छत पर पीओपी या थर्माकोल की शीट लगवा लें।
किचन के सामने के शयनकक्ष का उपाय- किचन और शयनकक्ष की बीच की छत पर एक विंड चेम लटका दें। शयनकक्ष का दरवाजे पर मोटे कपड़े का पर्दा लगाकर रखें।
किचन के नीचे के शयनकक्ष के लिए उपाय- किचन के गैस स्टोव के नीचे हरे रंग की एक मैट बिछा लें। किचन का काम हो जाने के बाद किचन को अच्छे से धो लें। किचन के फर्श पर गीला पोछा लगाएं।
अन्य उपाय : किचन में 2 एग्जॉस्ट फैन लगाएं जो किचन में काम करते वक्त और उसके बाद 1 घंटे तक चलता रहे। किचन में गैस स्टोव के ऊपर ऐसी चिमनी लगाएं जो सारी गर्मी खींचकर बाहर निकाल दें। जिसका धुंआ और अग्नि बाहर निकल जाए।