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न्याय के देवता शनि 141 दिन चलेंगे उल्टी चाल, मकर राशि में होंगे वक्री

Sun, 23 May 2021 07:17 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 23 May 2021 07:17 AM IST
सार

  • 23 मई की दोपहर 2 बजकर 23 मिनट पर शनि देव अपनी ही राशि मकर में वक्री हो जाएंगे और उल्टी चाल चलने लगेंगे। शनि 141 दिन वक्री अवस्था में रहेंगे और चार महीने बाद 11 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 58 मिनट पर शनि फिर से मार्गी हो जाएंगे।

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shani vakri on 23 may 2021 impact know shani upay
शनिदेव 23 मई, रविवार को अपनी ही राशि मकर में वक्री चाल से चलना आरंभ करेंगे और 11 अक्तूबर तक वक्री अवस्था में ही रहेंगे।  - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वैदिक ज्योतिष में शनि को सबसे क्रूर ग्रह माना जाता है। जो कि हम सभी के कर्मों का फल प्रदान करते हैं। इस वजह से 9 ग्रहों के परिवार में उन्हें न्यायाधीश की उपाधि भी दी गई है। इस साल शनिदेव 23 मई, रविवार को अपनी ही राशि मकर में वक्री चाल से चलना आरंभ करेंगे और 11 अक्तूबर तक वक्री अवस्था में ही रहेंगे। 

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शनि देवता भगवान सूर्य के पुत्र हैं। मान्यता है कि भगवान शनि के श्याम वर्ण के होने की वजह से भगवान सूर्य ने उन्हें अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया था। यही वजह है कि भगवान शनि अपने पिता से बैर रखते हैं। शनि यमराज के भाई और मां यमुना शनि की बहन हैं। शनिदेव को विशेष तौर पर संचित पाप कर्मों का फल प्रदान करने का अधिकार दिया है। इसलिए शनिदेव दंडाधिकारी कहलाते हैं। वे मृत्यु के देवता यमराज के अग्रज हैं, इसलिए महर्षि वेदव्यास ने नवग्रह स्तोत्र में उन्हें ‘यमाग्रज’कहा है। नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
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ज्योतिष शास्त्र में तमोगुण की प्रधानता वाले क्रूर ग्रह शनि को दुख का कारक बताया गया है। वह देव, दानव और मनुष्य आदि को त्रास देने में समर्थ हैं शायद इसीलिए उन्हें दुर्भाग्य देने वाला ग्रह माना जाता है। किंतु वास्तव में शनिदेव देवता हैं। मनुष्य के दुख का कारण स्वयं उसके कर्म हैं, शनि तो निष्पक्ष न्यायाधीश की भांति बुरे कर्मों के आधार पर वर्तमान जन्म में दंड भोग का प्रावधान करते हैं। किसी व्यक्ति को पूर्वकृत अशुभ कर्मों का दंड देने में शनि निमित्त मात्र हैं, मुख्य दोष तो उसके कर्मों का होता है।
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ज्योतिषीय दृष्टिकोण से शनि देव का बहुत महत्व है। यह किसी भी जातक की कुंडली में दुख, रोग, पीड़ा, खनिज, तेल, लोहा, विज्ञान आदि का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के 12 राशियों में से दो राशियां यानी कि मकर और कुंभ राशि पर शनि देवता का आधिपत्य है। वहीं 27 नक्षत्रों के बीच यह पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्रों के स्वामी माने जाते हैं। शनि तुला राशि में उच्च होते हैं और मेष राशि में नीच हो जाते हैं। 23 मई की दोपहर 2 बजकर 23 मिनट पर शनि देव अपनी ही राशि मकर में वक्री हो जाएंगे और उल्टी चाल चलने लगेंगे। शनि 141 दिन वक्री अवस्था में रहेंगे और चार महीने बाद 11 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 58 मिनट पर शनि फिर से मार्गी हो जाएंगे।


वक्री शनि में करें यह उपाय
श्री हनुमानजी की विशेष साधना शनि और राहु दोनों की दृष्टि को शांत करता है। इस दौरान वृषभ राशि स्थित राहु की मकर राशि पर दृष्टि भी शुभ सूचक नहीं है। हनुमान जी के भक्तों को शनि देवता कभी भी परेशान नहीं करते। ऐसे में आप मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। रामायण के सुंदरकांड का पाठ करेंगे तो और भी शुभ फल प्राप्त होगा। शनि देव इससे शीघ्र ही शांत होते हैं। भगवान शंकर की पूजा से भी शनिदेव का प्रकोप कम होता है। ऐसे में आप प्रतिदिन गाय के दूध में काला तिल मिला कर भगवान शंकर का अभिषेक करें। इससे शनि देवता के अशुभ प्रभाव खत्म होते हैं। 

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