Hindi Panchang 2022: वैदिक पंचांग के अनुसार जानिए दिन के शुभ और अशुभ काल, शुभ कार्य में जरूर रखें ध्यान
शुभ काल में किया जाने वाला मांगलिक कार्य हमेशा सफल होता है और वहीं अशुभ काल के दौरान किया गया शुभ और मांगलिक कार्य करने पर वह सफल नहीं होता।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Shubh Ashubh Muhurat In Astrology: हिंदू धर्म में समय-समय पर कुछ न कुछ त्योहार, अनुष्ठान, विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ और मांगलिक कार्य होते रहते हैं। अक्सर देखा जाता है कि जब किसी तरह का कोई शुभ कार्य या अनुष्ठान करने का संकल्प लिया जाता है तब ज्योतिष शास्त्र के विद्वान या पंडित से उस अनुष्ठान को करने के लिए शुभ दिन और शुभ काल के बारे में पूछा जाता है। फिर पंचांग की गणना को आधार बनाते हुए उस विशेष शुभ कार्य को करने के लिए अनुकूल और शुभ समय के बारे में जानकारी दी जाती है। ज्योतिष में किसी एक दिन को कई शुभ और अशुभ भागो में बांटा गया है। वैदिक ज्योतिष में एक दिन को अलग-अलग अवधि में विभाजित किया गया है। दिन के एक अवधि को काल कहा जाता है। जिसमें कुछ काल शुभ तो कुछ अशुभ होते हैं। शुभ काल में किया जाने वाला मांगलिक कार्य हमेशा सफल होता है और वहीं अशुभ काल के दौरान किया गया शुभ और मांगलिक कार्य करने पर वह सफल नहीं होता। आइए जानते हैं वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक दिन में कौन-कौन से और कितने काल शुभ और अशुभ होते हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार शुभ और अशुभ काल
1- प्रात:काल
दिन के सबसे पहले काल को प्रात:काल कहा जाता है। प्रात:काल की अवधि सूर्य के उदय होने से ठीक 48 मिनट पहले का समय होता है।
2- अरुणोदय काल
वैदिक पंचांग के अनुसार दिन का दूसरा काल अरुणोदय काल होता है। इस काल की अवधि सूर्योदय होने से ठीक 1 घंटे 12 मिनट पूर्व की होती है।
3- उषा काल
दिन का तीसरा काल उषाकाल कहलाता है। इस उषाकाल की अवधि सूर्योदय होने से ठीक 2 घंटे पूर्व का समय होता है।
4- अभिजीत काल
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अभिजीत काल दिन का सबसे शुभ काल होता है। इसमें सभी तरह के शुभ कार्य आसानी से किए जा सकते हैं। अभिजीत काल की अवधि दोपहर के समय लगभग 11 बजकर 36 मिनट से लेकर 12 बजकर 24 मिनट तक रहती है। अभिजीत काल लगभग एक घंटे का होता है। लेकिन बुधवार के दिन अभिजीत काल मान्य नहीं होता है।
5-प्रदोष काल
वैदिक गणना में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है। प्रदोष काल में की जाने वाली पूजा बहुत ही शुभ फलदायी मानी गई है। प्रदोष काल की अवधि सूर्यास्त होने से लेकर 48 मिनट बाद तक का समय होता है।
6-गोधूलि काल
वैदिक पंचांग के अनुसार गोधूलि काल सूर्यास्त होने से 24 मिनट पहले से शुरू होती है और सूर्यास्त के 24 मिनट बाद तक मान्य होती है।
7-राहुकाल
ज्योतिष में राहुकाल को अशुभ काल माना गया है। दिन में राहुकाल के दौरान शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। राहुकाल प्रतिदिन 1 घंटे 30 मिनट का होता है। सप्ताह के सातों दिन राहुकाल का समय अलग-अलग होता है जिसको ध्यान रखना जरूरी होता है।
रविवार- शाम 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक
सोमवार-प्रातः 7 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक
मंगलवार-दोपहर 3 बजे से 4बजकर 30 मिनट तक
बुधवार- दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक
गुरुवार- दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक
शुक्रवार- सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक
शनिवार- प्रातः 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक
8- गुलिक काल
राहुकाल की तरह गुलिक काल की अवधि भी डेढ़ घंटे की होती है। इस काल में भी विशेष शुभ कार्य को करने से बचना चाहिए।
रविवार-दोपहर 3 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक
सोमवार-दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक
मंगलवार-दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक
बुधवार- प्रात:10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक
गुरुवार- प्रातः 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक
शुक्रवार- प्रातः 07 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक
शनिवार- प्रातः 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक
9- यमगंड काल :
इसकी अवधि भी रोजाना डेढ़ घंटे की होती है। इससे भी शुभ नहीं माना जाता है।
रविवार - दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक
सोमवार -10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक
मंगलवार- प्रातः 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक
बुधवार- प्रातः 07 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक
गुरुवार - प्रातः 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक
शुक्रवार- दोपहर 3 बजे से 04 बजकर 30 मिनट तक
शनिवार- दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक