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Astrology: बड़े काम का है विमल राजयोग, जानिए कैसे जातक बन जाता है घोर साधक ?

Thu, 12 Jan 2023 02:10 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 12 Jan 2023 02:10 PM IST
सार

अगर बारहवें भाव का स्वामी छठे भाव में हो तो ऐसा जातक विद्वान होगा और अपने शत्रुओं को जीतकर उनका धन लेने वाला होता है। ऐसा जातक किसी से डरता नहीं है। 

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ज्योतिष में विपरीत राजयोग - फोटो : istock

विस्तार

वैदिक ज्योतिष के 12 भावों में छठे, आठवें और बारहवें भाव को दु:स्थान कहा गया है। विद्वानों के अनुसार इन भाव में शुभ ग्रह अच्छा फल नहीं देते हैं, अगर इन भावों में शुभ ग्रह पाप पीड़ित हो तो जातक जीवनभर परेशानी से घिरा रहता है। दरअसल बारहवें भाव से विदेश का विचार किया जाता है ये सब जानते है, लेकिन बहुत कम लोग ये जानते हैं कि इस भाव से एकांत और कल्पना शक्ति का विचार भी किया जाता है। दरअसल यह भाव उन अज्ञात शक्तियों का भाव है जिसका अंदाज़ा खुद इंसान को नहीं होता लेकिन जब वो एकांत वास लेता है तब उसे समझ आता है कि वो किन दिव्य और अलौकिक शक्ति का स्वामी होता है। अक्सर इन भाव से जुड़ी बुरी बातें ही लोगों को पढ़ने को मिलती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन भावों के स्वामी भी राजयोग का निर्माण करते हैं। आज इस लेख में हम हम ऐसे ही राजयोग की बात करने वाले हैं जिसे “विमल राजयोग”कहा गया है और वो बारहवें भाव के स्वामी से ही बनता है। 

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1 - ज्योतिष के ग्रंथों में यह लिखा गया है कि अगर बारहवें भाव का स्वामी अपने ही भाव में, छठे भाव में या बारहवें भाव में हो ऐसा व्यक्ति विपरीत राजयोग का फल प्राप्त करता है। 
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2 - दरअसल दु:स्थान का स्वामी अगर दु:स्थान में ही तो विद्वानों के मत से वो हानि नहीं करेगा बल्कि भाव से जुड़े बुरे परिणाम को रोक देगा। 
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3 - अगर बारहवें भाव का स्वामी अपने ही स्थान में या छठे और आठवें भाव में हुआ तो जातक को विमल नाम के राजयोग का फल प्राप्त होगा। 

4 - अगर बारहवें भाव का स्वामी छठे भाव में हो तो ऐसा जातक विद्वान होगा और अपने शत्रुओं को जीतकर उनका धन लेने वाला होता है। ऐसा जातक किसी से डरता नहीं है। 

5 - अगर बारहवें भाव का स्वामी आठवें ही भाव में हो तो जातक परम ज्ञानी और गुप्त विद्या का स्वामी बन जाता है। वो जब भी मुसीबत में आएगा कोई ना कोई अदृश्य शक्ति उसकी मदद करेगी। 


6 - अगर बारहवें भाव का स्वामी बारहवें भाव में हो तो जातक राजा के समान सुख लेता है। इस योग में शुक्र मंगल हो तो स्त्री खुद ऐसा व्यक्ति से मित्रता करती है। ऐसा व्यक्ति समुद्री यात्राएं बहुत करता है। 

सरल राजयोग बिल्कुल अपने नाम की तरह है। इसका अर्थ यह हुआ कि जीवन में चाहे कितनी ही कठिनाई जातक के जीवन में क्यों नहीं आये जातक सरलता से उन पर विजय प्राप्त करता है।


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