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Venus Transit 2025: शुक्र का राशि परिवर्तन, जानिए सिंह राशि के जातकों पर कैसा पड़ेगा प्रभाव
Mon, 30 Jun 2025 01:36 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 30 Jun 2025 01:36 PM IST
सार
Venus Transit 2025 : सिंह राशि के जातकों के लिए शुक्र आपकी कुंडली के तीसरे और दशम भाव के स्वामी होते हैं और अब यानी 29 जून को शुक्र के वृषभ राशि में गोचर करने से यह आपके कर्म भाव यानी दशम स्थान पर होंगे।
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शुक्र राशि परिवर्तन
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
Venus Transit 2025 : सुख, वैभव और सौंदर्य के कारक ग्रह शुक्र 29 जून 2025 को गोचर करते हुए मेष से वृषभ राशि में आ गए हैं। वृषभ राशि शुक्रदेव की स्वयं का राशि होती है जिसमें यह 26 जुलाई तक रहेंगे, फिर इसके बाद मिथुन राशि में गोचर कर जाएंगे। शुक्र के अपनी राशि में परिवर्तन के कारण इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों के ऊपर देखने को मिलेगा। ऐसे में आइए जानते हैं सिंह राशि के जातकों के ऊपर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
शुक्र गोचर से सिंह राशि पर प्रभाव
सिंह राशि के जातकों के लिए शुक्र आपकी कुंडली के तीसरे और दशम भाव के स्वामी होते हैं और अब यानी 29 जून को शुक्र के वृषभ राशि में गोचर करने से यह आपके कर्म भाव यानी दशम स्थान पर होंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दशम भाव में शुक्र का गोचर अच्छा परिणाम नहीं देता है। यह व्यक्ति की मानसिक चिंताओं में वृद्धि करवाता है और कार्यों में बाधाएं लाता है। ऐसे में इस दौरान आपको कामों में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं रहेगा, आपको अपने निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति होगी और रुका हुआ धन मिलेगा। भाग्य का साथ मिलेगा।
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ज्योतिष में शुक्र ग्रह का महत्व
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को बहुत ही शुभ और लाभकारी ग्रह माना जाता है। कालपुरुष की कुंडली में यह दूसरे और सातवें भाव के स्वामी होते हैं।
- शुक्र ग्रह का गोचर एक से दूसरी राशि में होने के लिए करीब 27 दिनों का समय लगता है।
- शुक्र मीन राशि में उच्च के होते हैं जबकि कन्या राशि में नीच की अवस्था में होते हैं। इसके साथ सभी 27 नक्षत्रों में ये पूर्वाषाढ़ा, भरणी और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी होते हैं।
- शुक्र ग्रह की शनि और बुध ग्रह के साथ मित्रता का भाव रहता है जबकि चंद्रमा और सूर्य इनके शत्रु माने जाते हैं।
- शुक्र ग्रह कुंडली में जब अपनी स्वराशि यानी वृषभ या तुला में या फिर अपनी उच्च राशि मीन में विराजमान होकर कुंडली के केंद्र भाव में होते हैं तो मालव्य राजयोग का निर्माण होता है। इस योग से व्यक्ति को जीवन में सभी तरह की सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है।
- इसके अलावा एक दूसरा राजयोग बनता है लक्ष्मी नारायण राजयोग। इस में बुध और शुक्र की युति किसी भाव में बनने पर होती है।
- जिन लोगों की कुंडली में शुक्र कमजोर होते हैं, उनको जीवन में तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- शुक्र के कमजोर होने पर व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं।
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शुक्र गोचर से सिंह राशि पर प्रभाव
सिंह राशि के जातकों के लिए शुक्र आपकी कुंडली के तीसरे और दशम भाव के स्वामी होते हैं और अब यानी 29 जून को शुक्र के वृषभ राशि में गोचर करने से यह आपके कर्म भाव यानी दशम स्थान पर होंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दशम भाव में शुक्र का गोचर अच्छा परिणाम नहीं देता है। यह व्यक्ति की मानसिक चिंताओं में वृद्धि करवाता है और कार्यों में बाधाएं लाता है। ऐसे में इस दौरान आपको कामों में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं रहेगा, आपको अपने निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति होगी और रुका हुआ धन मिलेगा। भाग्य का साथ मिलेगा।
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ज्योतिष में शुक्र ग्रह का महत्व
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को बहुत ही शुभ और लाभकारी ग्रह माना जाता है। कालपुरुष की कुंडली में यह दूसरे और सातवें भाव के स्वामी होते हैं।
- शुक्र ग्रह का गोचर एक से दूसरी राशि में होने के लिए करीब 27 दिनों का समय लगता है।
- शुक्र मीन राशि में उच्च के होते हैं जबकि कन्या राशि में नीच की अवस्था में होते हैं। इसके साथ सभी 27 नक्षत्रों में ये पूर्वाषाढ़ा, भरणी और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी होते हैं।
- शुक्र ग्रह की शनि और बुध ग्रह के साथ मित्रता का भाव रहता है जबकि चंद्रमा और सूर्य इनके शत्रु माने जाते हैं।
- शुक्र ग्रह कुंडली में जब अपनी स्वराशि यानी वृषभ या तुला में या फिर अपनी उच्च राशि मीन में विराजमान होकर कुंडली के केंद्र भाव में होते हैं तो मालव्य राजयोग का निर्माण होता है। इस योग से व्यक्ति को जीवन में सभी तरह की सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है।
- इसके अलावा एक दूसरा राजयोग बनता है लक्ष्मी नारायण राजयोग। इस में बुध और शुक्र की युति किसी भाव में बनने पर होती है।
- जिन लोगों की कुंडली में शुक्र कमजोर होते हैं, उनको जीवन में तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- शुक्र के कमजोर होने पर व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं।
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