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Solar Eclipse 2021 Predictions: सूर्य ग्रहण भारत, भाजपा, अमेरिका और विश्व के लिए अशुभ

पंडित राजीव नारायण शर्मा Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 10 Jun 2021 07:05 AM IST
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solar eclipse 2021: इस संवत्सर (2078) का यह दूसरा और प्रथम सूर्यग्रहण है। इस वर्ष दिसंबर तक दो और ग्रहण(1 सूर्य और 1 चंद्र ग्रहण) वृश्चिक वृषभ राशि की ही एक्सिस में पड़ेंगे।
solar eclipse 2021: इस संवत्सर (2078) का यह दूसरा और प्रथम सूर्यग्रहण है। इस वर्ष दिसंबर तक दो और ग्रहण(1 सूर्य और 1 चंद्र ग्रहण) वृश्चिक वृषभ राशि की ही एक्सिस में पड़ेंगे।

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  • कंकण (Annular)सूर्य ग्रहण 10  जून 2021 (शनिश्चरी अमावस्या) को दोपहर 13.43 मिनट पर शुरू होगा, इसकी उच्चतम अवस्था 3.25 तक और समाप्ति सांय काल 6.41 पर होगी। यह ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र और वृषभ राशि में पड़ेगा। ग्रहण के समय ब्रह्माण्ड में कन्या लग्न होगा। यह ग्रहण, पृथ्वी तत्व की राशि वृषभ में पड़ेगा, जो भारत और वर्तमान संवत्सर का भी लग्न है, इस राशि में राहु, सूर्य, चन्द्र, वक्री बुध स्थित हैं। नीच राशि में स्थित क्रूर ग्रह मंगल की 8वीं दृष्टि दशम भाव, दशमेश शनि और अष्टमेष गुरु पर पड़ रही है, इसलिए यह अशुभ ग्रहण योग सत्ता, उनके शीर्ष नेतृत्व, मीडिया, न्याय व्यवस्था, धर्मगुरुओं, धार्मिक संस्थानों महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिए आने वाला समय चुनौती भरा और अनेक प्रकार के संकट देने वाला होगा। सत्तादल (6.4.80), की कुंडली मिथुन लग्न और वृश्चिक राशि की है, इनकी 2018 से 10 वर्ष की चंद्रमा की दशा चल रही है। 2021 के चारों ग्रहण, इनकी जन्म राशि की एक्सिस में पड़ रहे हैं, अतः समस्त राजनीतिक दलों से ज्यादा, इनके लिए अनेक अशुभ फल, अपमान और संकटों का योग है।
  • इस संवत्सर (2078) का यह दूसरा और प्रथम सूर्यग्रहण है। इस वर्ष दिसंबर तक दो और ग्रहण(1 सूर्य और 1 चंद्र ग्रहण) वृश्चिक वृषभ राशि की ही एक्सिस में पड़ेंगे। संवत्सर 2078 और स्वतंत्र भारत(15.8.47) की कुंडली वृषभ लग्न की है। लग्न राशि, सम्पूर्ण देश की अवस्था, लोगों का स्वास्थ्य, मंत्रिमंडल, प्रशासनिक अधिकारियों, राजनीतिक नेताओं का चरित्र इत्यादि का संकेत देती है। चतुर्थ भाव, उसके स्वामी सूर्य आंतरिक सुख, सरकार की नीतियां, किसानों, कृषि, मौसम डॉक्टर, चिकित्सा क्षेत्र, दवाईयां, वैक्सीन, कानून व्यवस्था आदि के कारक हैं। 
  • किसी भी कुंडली में लग्न से पूर्व दिशा, चौथे भाव से उत्तर, सातवें भाव से पश्चिम और दसवें भाव से दक्षिण दिशा देखी जाती है। यही कारण है कि ग्रहण और अशुभ ग्रहों के इस योग के कारण भारत की अर्थव्यवस्था, देश की संपूर्ण अवस्था चिंता का विषय बनी रहेंगी। पूर्व, उ.पूर्व, द.पूर्व, उत्तर, मध्यभारत, पश्चिम, दक्षिण, दक्षिण पश्चिम दिशाओं से बीमारी, मृत्यु, प्रचंड गर्मी, बाढ़, चक्रवात, तूफान, भूकंप आदि अन्य अशुभ समाचार मिलेंगे।
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