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Chandra Grahan 2022: हर बार पूर्णिमा तिथि पर ही क्यों लगता है चंद्र ग्रहण, जानिए इसके पीछे का कारण ?
Tue, 08 Nov 2022 12:03 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 08 Nov 2022 12:03 AM IST
सार
हिंदू पंचांग के अनुसार यह चंद्र ग्रहण कार्तिक पूर्णिमा तिथि के दिन लगेगा जबकि 15 दिन पहले 25 अक्तूबर को दिवाली के फौरन बाद कार्तिक अमावस्या तिथि पर साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगा था। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि ग्रहण हमेशा पूर्णिमा और अमावस्या तिथि पर ही क्यों लगता है।
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Chandra Grahan 2022: हिंदू मान्यताओं में ग्रहण का विशेष स्थान होता है। ग्रहण को शुभ घटना नहीं मानी जाता है
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Know Why Luner Eclipse Occurs On Purnima Tithi: 08 नवंबर,मंगलवार का साल 2022 का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत समेत दुनिया के कई जगहों पर देखा जा सकेगा। हिंदू मान्यताओं में ग्रहण का विशेष स्थान होता है। ग्रहण को शुभ घटना नहीं मानी जाता है, जबकि विज्ञान के नजरिए से ग्रहण सिर्फ एक खगोलीय घटना होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह चंद्र ग्रहण कार्तिक पूर्णिमा तिथि के दिन लगेगा जबकि 15 दिन पहले 25 अक्तूबर को दिवाली के फौरन बाद कार्तिक अमावस्या तिथि पर साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगा था। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि ग्रहण हमेशा पूर्णिमा और अमावस्या तिथि पर ही क्यों लगता है। हिंदू पंचांग की गणना के मुताबिक सभी चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि को और सभी सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि को लगता है। आइए जानते हैं इसके पीछे क्या कारण होते हैं।
चंद्र ग्रहण कैसे लगता है?
सूर्य के चारों तरफ पृथ्वी घूमती है और चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है। इस प्रक्रिया में एक ऐसा समय आता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य एक ही सीध में आ जाते हैं और सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर पड़ता है लेकिन चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता है। इस घटना को खगोलीय घटना के रूप में चंद्रग्रहण कहा जाता है।
हमेशा पूर्णिमा तिथि पर ही चंद्र ग्रहण क्यों?
हिंदू पंचांग के अनुसार चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि पर ही होता है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक हर एक माह में पूर्णिमा तिथि जरूर आती है लेकिन हर पूर्णिमा पर ग्रहण लगे ऐसा संभव नहीं होता। दरअसल चंद्रमा पृथ्वी की कक्षा पर करीब 5 डिग्री तक झुकी रहती है। इस झुकाव के कारण हर बार चंद्रमा पृथ्वी की छाया में होकर नहीं गुजरता है। जिसके कारण ज्यादातर मौके पर चंद्रमा पृथ्वी के ऊपर या नीचे से निकल जाता है। इस कारण से हर पूर्णिमा की तिथि चंद्र ग्रहण की घटना नहीं होती है, लेकिन जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है तो उस दिन पूर्णिमा होती है और सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनों एक सीध में आ जाते हैं। इस कारण से पूर्णिमा के दिन ही चंद्र ग्रहण संभव होता है।
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सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि पर क्यों?
वहीं अमावस्या तिथि पर ही सूर्य ग्रहण लगता है। दरअसल चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर काटता है और एक चक्कर काटने में 27 दिन लगते हैं। जब पृथ्वी और सूर्य के मध्य में चंद्रमा आ जाता है तो इस घटना को चंद्र ग्रहण कहते है। अमावस्या तिथि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है इस कारण से अमावस्या तिथि पर ही हमेशा सूर्य ग्रहण होता है।
Chandra Grahan 2022 Effects: 8 नवंबर को है साल का आखिरी चंद्रग्रहण, जानिए कुंभ राशि पर क्या होगा इसका प्रभाव
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चंद्र ग्रहण कैसे लगता है?
सूर्य के चारों तरफ पृथ्वी घूमती है और चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है। इस प्रक्रिया में एक ऐसा समय आता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य एक ही सीध में आ जाते हैं और सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर पड़ता है लेकिन चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता है। इस घटना को खगोलीय घटना के रूप में चंद्रग्रहण कहा जाता है।
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हमेशा पूर्णिमा तिथि पर ही चंद्र ग्रहण क्यों?
हिंदू पंचांग के अनुसार चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि पर ही होता है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक हर एक माह में पूर्णिमा तिथि जरूर आती है लेकिन हर पूर्णिमा पर ग्रहण लगे ऐसा संभव नहीं होता। दरअसल चंद्रमा पृथ्वी की कक्षा पर करीब 5 डिग्री तक झुकी रहती है। इस झुकाव के कारण हर बार चंद्रमा पृथ्वी की छाया में होकर नहीं गुजरता है। जिसके कारण ज्यादातर मौके पर चंद्रमा पृथ्वी के ऊपर या नीचे से निकल जाता है। इस कारण से हर पूर्णिमा की तिथि चंद्र ग्रहण की घटना नहीं होती है, लेकिन जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है तो उस दिन पूर्णिमा होती है और सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनों एक सीध में आ जाते हैं। इस कारण से पूर्णिमा के दिन ही चंद्र ग्रहण संभव होता है।
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सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि पर क्यों?
वहीं अमावस्या तिथि पर ही सूर्य ग्रहण लगता है। दरअसल चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर काटता है और एक चक्कर काटने में 27 दिन लगते हैं। जब पृथ्वी और सूर्य के मध्य में चंद्रमा आ जाता है तो इस घटना को चंद्र ग्रहण कहते है। अमावस्या तिथि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है इस कारण से अमावस्या तिथि पर ही हमेशा सूर्य ग्रहण होता है।
| साल का आखिरी चंद्र ग्रहण | जानकारी |
| चंद्र ग्रहण | 08 नवबंर 2022 |
| चंद्र ग्रहण की शुरुआत | दोपहर 02:39 मिनट से |
| भारत में चंद्र ग्रहण | 4:23 से 6:19 तक |
| सूतककाल प्रारंभ | सुबह 09:21 मिनट से |
| सूतककाल समापन | शाम 06:19 मिनट पर |
| देश में पूर्ण चंद्र ग्रहण | कोलकाता, कोहिमा, पटना, पुरी, रांची और ईटानगर |
| देश में आंशिक चंद्र ग्रहण | शेष भारत में आंशिक चंद्र ग्रहण |
| विदेश में चंद्र चंद्र ग्रहण | उत्तरी-पूर्वी यूरोप,एशिया,ऑस्ट्रेलिया,प्रशान्त महासागर और अमेरिका |
आपके शहर में चंद्र ग्रहण का समय
| शहर | कब से शुरू | शहर | कब से शुरू |
| दिल्ली | 5.28 | नोएडा | 5.30 |
| अमृतसर | 5.32 | लखनऊ | 5.16 |
| भोपाल | 5.36 | लुधियाना | 5.34 |
| जयपुर | 5.37 | शिमला | 5.20 |
| मुंबई | 6.01 | कोलकाता | 4.52 |
| रायपुर | 5.21 | पटना | 5.00 |
| इंदौर | 5.43 | देहरादून | 5.22 |
| उदयपुर | 5.49 | गांधीनगर | 5.55 |
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