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Budh Gochar 2025: 23 मई को बुध का गोचर, जानिए कन्या राशि वालों पर कैसा पड़ेगा प्रभाव ?
Thu, 22 May 2025 05:06 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 22 May 2025 05:06 PM IST
सार
Budh Gochar 2025: कन्या राशि के लोगों के लिए बुध लग्न और दसवें भाव के स्वामी होकर 23 मई को यह आपके नवम भाव में गोचर करेंगे। कुंडली का नवम भाव भाग्य का भाव कहलाता है।
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बुध गोचर 2025
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Budh Gochar 2025: 23 मई को बुद्धि और व्यापार के कारक ग्रह बुध वृषभ राशि में गोचर करने जा रहे हैं। ज्योतिष में बुध ग्रह को राजकुमार माना गया है। यह संचार, बुद्धि, तर्क-क्षमता और लेखन से संबंधित ग्रह हैं। बुध मिथुन और कन्या राशि वालों के स्वामी होते हैं। बुध के वृषभ राशि में गोचर करने से कन्या राशि वालों पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
कन्या राशि पर प्रभाव
कन्या राशि के लोगों के लिए बुध लग्न और दसवें भाव के स्वामी होकर 23 मई को यह आपके नवम भाव में गोचर करेंगे। कुंडली का नवम भाव भाग्य का भाव कहलाता है। इसके अलावा यह भाव गुरु, धर्म और तीर्थयात्रा से संबंधित होता है। बुध के वृषभ राशि में गोचर करने से कन्या राशि वालों को मिलजुले परिणाम देखने को मिल सकते हैं। करियर के लिहाज से कन्या राशि वालों को कुछ अवसर मिल सकता है। लेकिन सेहत संबंधी मामलों में आपको सावधानी बरतनी होगी। इस दौरान कहीं घूमने जाने की भी प्लानिंग कर सकते हैं। राशि से नवम भाग्य भाव में गोचर करते हुए बुध का प्रभाव हर तरह से भाग्योन्नति करेगा। धर्म और अध्यात्म के प्रति रुचि बढ़ेगी। धार्मिक ट्रस्टों तथाअनाथालय में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे और दान पुण्य भी करेंगे। अपने पराक्रम के बलपर कठिन परिस्थितियों पर भी नियंत्रण पा लेंगे।
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ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। कुंडली में उनकी स्थिति व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती हैं। यदि बुध जन्म कुंडली में लग्न भाव में हो, तो जातक संवाद में कुशल बनता है। इतना ही नहीं बुध के प्रभाव से व्यक्ति का व्यक्तित्व भी बढ़ता है और वह शारीरिक रूप से सुंदर बनता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध कमजोर होता है, तो वह अक्सर बीमारियों से घिरा रहता है। इसके अलावा जातक पाचन शक्ति कमजोर, पेट दर्द और बालों की समस्याएं भी झेलता है। वहीं कुंडली में बुध की स्थिति सही न होने पर संवाद में दिक्कतें आने लगती है, जिस कारण रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही व्यापार में असफलता, नौकरी में तनाव और शिक्षा के क्षेत्र में बार-बार असफलताएं मिलने लगती हैं।
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कन्या राशि पर प्रभाव
कन्या राशि के लोगों के लिए बुध लग्न और दसवें भाव के स्वामी होकर 23 मई को यह आपके नवम भाव में गोचर करेंगे। कुंडली का नवम भाव भाग्य का भाव कहलाता है। इसके अलावा यह भाव गुरु, धर्म और तीर्थयात्रा से संबंधित होता है। बुध के वृषभ राशि में गोचर करने से कन्या राशि वालों को मिलजुले परिणाम देखने को मिल सकते हैं। करियर के लिहाज से कन्या राशि वालों को कुछ अवसर मिल सकता है। लेकिन सेहत संबंधी मामलों में आपको सावधानी बरतनी होगी। इस दौरान कहीं घूमने जाने की भी प्लानिंग कर सकते हैं। राशि से नवम भाग्य भाव में गोचर करते हुए बुध का प्रभाव हर तरह से भाग्योन्नति करेगा। धर्म और अध्यात्म के प्रति रुचि बढ़ेगी। धार्मिक ट्रस्टों तथाअनाथालय में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे और दान पुण्य भी करेंगे। अपने पराक्रम के बलपर कठिन परिस्थितियों पर भी नियंत्रण पा लेंगे।
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बुध का कुंडली पर प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। कुंडली में उनकी स्थिति व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती हैं। यदि बुध जन्म कुंडली में लग्न भाव में हो, तो जातक संवाद में कुशल बनता है। इतना ही नहीं बुध के प्रभाव से व्यक्ति का व्यक्तित्व भी बढ़ता है और वह शारीरिक रूप से सुंदर बनता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध कमजोर होता है, तो वह अक्सर बीमारियों से घिरा रहता है। इसके अलावा जातक पाचन शक्ति कमजोर, पेट दर्द और बालों की समस्याएं भी झेलता है। वहीं कुंडली में बुध की स्थिति सही न होने पर संवाद में दिक्कतें आने लगती है, जिस कारण रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही व्यापार में असफलता, नौकरी में तनाव और शिक्षा के क्षेत्र में बार-बार असफलताएं मिलने लगती हैं।
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