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ग्रह-नक्षत्र: आज का दिन ज्योतिष नजरिए से रहेगा बेहद खास, बन रहा है खास संयोग

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 04 Jul 2019 08:04 AM IST
ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों और नक्षत्रों की भूमिका
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हिंदू धर्म और ज्योतिष में कुछ तिथियां बहुत विशेष और शुभ मानी जाती है। विशेष तिथि और शुभ मुहूर्त में किया जाने वाला कोई भी काम जरूर सफल होता है। इस बार भी 4 जुलाई को विशेष शुभ मुहूर्त बन रहा है। 4 जुलाई को गुरु पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु पुष्य को बहुत महत्व दिया जाता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उत्सव भी मनाया जाएगा। 4 जुलाई को गुरु पुष्य योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। इन सभी शुभ योगो के साथ 4 जुलाई का दिन फलदायी और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ रहेगा। शास्त्रों में इस शुभ योग को अबूझ व स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी माना गया है। अबूझ मुहूर्त होने से इस दिन नया काम  करना, गृह प्रवेश, जमीन खरीदना, व्यापार आरंभ करना, नया वाहन खरीदने का शुभ दिन रहता है।
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क्या होता है गुरु- पुष्य नक्षत्र
ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं, जिसमें 8वां स्थान पुष्य नक्षत्र का होता है। यह नक्षत्र बहुत ही शुभ और सुखद फल प्रदान करने वाला होता है। इसे सभी 27 नक्षत्रों में सबसे श्रेष्ठ और नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। भगवान राम का जन्म भी इसी नक्षत्र में हुआ था। नक्षत्र हर रोज बदलते रहते हैं और हर दिन बदलने वाले नक्षत्र में पुष्य नक्षत्र भी शामिल है। हर 27वें दिन पुष्य नक्षत्र होता है। यह जिस दिन आता है, इसका नाम भी उसी प्रकार रखा जाता है। 4 जुलाई को पुष्य नक्षत्र गुरुवार के दिन पड़ रहा है। इसी प्रकार से गुरु पुष्य नक्षत्र योग कहा जाता है।

पुष्य नक्षत्र में पैदा हुए व्यक्तियों का स्वभाव और भविष्य
पुष्य नक्षत्र को ज्योतिष शास्त्र में सबसे शुभ माना गया है। इसे सभी 27 नक्षत्रों में सबसे श्रेष्ठ और नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। भगवान राम का जन्म भी इसी नक्षत्र में हुआ था। इस नक्षत्र में जन्में लोग बहुत मेहनती होते हैं और अपने दम पर जीने में भरोसा करते हैं। अपनी मेहनत की बदौलत धीरे-धीरे ही सही लेकिन कामयाबी जरूर हासिल करते हैं। कम उम्र में ही कई परेशानियों का सामना करते करते ये जल्दी परिपक्व और भीतर से मजबूत हो जाते हैं। इन्हें संयमित और व्यवस्थित जीवन जीना पसंद होता है।

इन चीजों के लिए होता है शुभ 
इस नक्षत्र में मंत्र दीक्षा, उच्च शिक्षा ग्रहण, भूमि, क्रय-विक्रय, आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना, यज्ञ अनुष्ठान और वेद पाठ आरंभ करना, गुरु धारण करना, पुस्तक दान करना और विद्या दान करना और विदेश यात्रा आरंभ करने के लिए श्रेष्ठ होता है। 

नहीं किए जाते हैं ये शुभ कार्य
गुरु पुष्य नक्षत्र में विवाह को छोड़कर अन्य कोई भी कार्य किया जा सकता है। माता पार्वती के श्राप के कारण पुष्य नक्षत्र में विवाह करना अशुभ माना गया है। 
 

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