ऊखीमठ। तहसील एवं ब्लॉक मुख्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर बना कूड़ा डंपिंग जोन आम नागरिकों की आवाजाही के लिए चुनौती बना हुआ है। कूड़ा डंपिंग जोन को कवर करने के लिए लगाई गई टिन के साथ ही यहां पर कुत्तों एवं बन्दरों का जमावड़ा भी मानवीय सुरक्षा के लिए दुगना खतरा पैदा कर रहा है। ऊखीमठ नगर क्षेत्र में समुचित विकास के लिए 4 अप्रैल 2013 को नगर पंचायत का गठन हुआ, लेकिन 13 वर्ष गुजर जाने के बाद भी यह कूड़ा डंपिंग जोन स्थानांतरित नहीं हो पाया। स्थानीय निवासी अनिल कुंवर का कहना है कि ऊखीमठ के प्रवेश द्वार पर बने इस कूड़ा डंपिंग जोन से गुजरने वाले स्कूली बच्चों, नागरिकों एवं यहां आने जाने वाले यात्रियों एवं पर्यटकों को बदबू से बचने के लिए नाक दबाकर गुजरना पड़ता है जो ऊखीमठ में स्वच्छता की पोल खोल रहा है।छात्र नेता शौरभ विराट भट्ट का कहना है कि इस संबंध में एन.जी.टी.को भी पत्र लिखकर शिकायत की गई थी लेकिन कोई परिणाम नहीं मिल पाये। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विजय राणा का कहना है कि उनके कार्यकाल के दौरान कूड़ा निस्तारण केन्द्र के भूमि स्थानांतरण के लिए शासन द्वारा एक करोड़ इकसठ लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति दी गई थी और पिचहतर लाख रुपए की प्रथम क़िस्त भी नगर निकाय को प्राप्त हो चुकी थी। वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत अध्यक्ष कुब्जा धर्म्वाण ने बताया कि वर्ष 2019 से 2023 तक वन भूमि स्थानांतरण की कार्यवाही पूर्ण न होने से धनराशि भारत सरकार को वापस चली गई थी। धनराशि के लिए राजस्व भूमि पर कूड़ा निस्तारण केन्द्र को स्थानांतरित किए जाने का पुनः अनुरोध किया गया जिसकी स्वीकृति मिल गई है। अब उन्होंने शासन, प्रशासन व नगर वासियों से भूमि उपलब्ध कराने में सहयोग मांगा है।