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ऋषिकेश: परमार्थ निकेतन में गंगा तट पर शबरी रामलीला का आयोजन

परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर मां शबरी रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 15 अक्टूबर तक किया जाएगा। परमार्थ निकेेतन में चौथी बार मां शबरी रामलीला में शबरी का चरित्र भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का ऐसा अनुपम उदाहरण है। जिसमें प्रतीक्षा साधना बन जाती है, सेवा आराधना बन जाती है। प्रेम स्वयं परमात्मा तक पहुंचने का सेतु बन जाता है। इसमें आदिवासी एवं जनजातीय समुदायों के कलाकार अपनी लोकपरंपराओं, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों और जीवंत अभिनय के माध्यम से रामकथा को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। उनकी प्रस्तुति में पीढ़ियों से संजोई गई सांस्कृतिक विरासत, लोकजीवन की सहजता और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। स्वामी चिदानंद सरस्वती के सान्निध्य में गंगा के तट परमार्थ निकेतन में महाकुंभ के दौरान परमार्थ शिविर में रामलीला का यह आयोजन भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ समाज को प्रेम, सेवा, सद्भाव और एकात्मता के सूत्र में जोड़ने का माध्यम है। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि शबरी रामलीला का यह आयोजन नारी शक्ति और नारी गरिमा का भी प्रेरक संदेश देता है। आध्यात्मिक ऊंचाई किसी बाहरी पहचान से नहीं बल्कि अंतकरण की पवित्रता, दृढ़ विश्वास और साधना से प्राप्त होती है। उनका चरित्र हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने विश्वास, मूल्यों और संकल्प को बनाए रखता है। राहुल, हितेश, चंचल, राहुल परिहार,हरमीत सिंह, निदेशक डॉ. अनु, चारू, प्रवीण आदि कलाकारों की ओर से रामलीला मंचन किया जाएगा।

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