देवाल। लोक संस्कृति और आस्था का प्रतीक श्री नंदा राज राजेश्वरी लोकजात यात्रा श्रद्धालुओं के जयकारों और पारंपरिक वाद्यों की मधुर ध्वनि के बीच माँ नंदा की डोली मंगलवार को फल्दियागांव से प्रस्थान कर कांडेई, पिलखडा, ल्वाणी, हरनी- बगडीगाण होते हुए रात्रि विश्राम के लिए मुन्दोली गाँव पहुँच गई है। मुन्दोली पहुँचने पर स्थानीय ग्रामीणों ने माँ की डोली का मांगलगीत दैणा होया खोली का गणेशा हे, दैणा होया मोरी का नारेणा हे---से भव्य स्वागत किया। बुधवार को लोकजात यात्रा और मां नंदा की डोली लोहाजंग से होते हुए आवादी के अंतिम गांव वाण पहुंचेगी, जहाँ यात्रा का रात्रि प्रवास होगा। विभिन्न क्षेत्रों से आए सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहले ही अंतिम गाँव वाण में डेरा डाले हुए हैं। पूरे क्षेत्र में माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है। यात्रा को सकुशल संपन्न कराने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। मौके पर भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही मुख्य विकास अधिकारी, एडीएम, पुलिस अधीक्षक सहित तमाम आला अधिकारी नंदा लोक जात यात्रा और बड़ी जात की सुरक्षा व्यवस्थाओं का लगातार जायजा ले रहे हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इस यात्रा में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। हर कोई माँ नंदा की एक झलक पाकर खुद को धन्य महसूस कर रहा है। यशवंत बडियारी