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Video: श्रावस्ती में राप्ती की मुख्य धारा में जमी रेत, किनारों पर कटान कर रही राप्ती

जलस्तर घटने के साथ ही जमुनहा तहसील क्षेत्र में राप्ती की लहरों ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है।राप्ती नदी के किनारों पर बसे गांवों में फसल लगे खेतों को अपना निशाना बना रही है और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। राप्ती बीते कुछ दिनों में 15 से अधिक किसानों के 30 बीघा से अधिक खेत को निगल गई है और कटान अब भी जारी है। तराई में बीते 10 दिनों से रुक-रुक कर जारी बारिश से राप्ती का जलस्तर बढ़ गया है। राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान 127.70 मीटर से नीचे है और लगातार 127 मीटर व 127.10 मीटर के बीच बना हुआ है। राप्ती का जलस्तर घटने के साथ ही राप्ती की लहरें क्रूर बन गई हैं और किसानों के खेतों को निगल रही हैं। वीरपुर निवासी किसान दयाराम ने बताया कि उनका दो बीघा खेत नदी में समाहित हो गया है। वीरपुर निवासी बाबूलाल, आशाराम, रामफकीरे, देवा महराज, बाबादीन, अमेरिका यादव, ओमकार चौहान, गिरवर प्रसाद, सुंदर लाल, ननकू , सहजराम पाठक व दयाराम आदि ने बताया कि उनके खेत राप्ती के मुहाने पर हैं और राप्ती थोड़़ा-थोड़ा कर खेतों को धारा में समाहित कर रही है। ग्रामीणों ने बताया अब तक 30 बीघा से अधिक खेत नदी में समाहित हो चुका है। मुख्य धारा में जमी रेत बनी मुसीबत राप्ती की मुख्य धारा में रेत जम गई है। ग्रामीणों ने बताया कि धीरे-धीरे कर बीते कुछ सालों में नदी की मुख्य धारा के बीच में रेत जमा हो गई है और बीच में नदी की गहराई कम हो गई है। जिसके चलते नदी की धारा दोनों किनारों की ओर से तेजी से बह रही है और कटान कर रही है। ग्रामीणों ने बताया कि जिम्मेदार मुख्य समस्या को दूर करने के बजाए किनारों पर रेत की बोरियां व बांस डालकर इतिश्री कर रहे हैं। जिसके चलते हम लोगों को अपनी फसल व खेत गंवाने पड़ रहे हैं।

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