संवाद न्यूज एजेंसी तालबेहट। खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मंगलवार को तेरई फाटक के पास झांसी से आ रही एक स्लीपर बस से बड़ी मात्रा में संदिग्ध खाद्य सामग्री बरामद की। बस की जांच में मावा, मिल्क केक, बर्फी और हींग बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मिली। विभाग ने बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई है। टीम ने नमूने लेने के बाद पूरी सामग्री नष्ट करा दी, जबकि पुलिस ने बस को सीज कर दिया। तेरई फाटक के पास बस की जांच के दौरान खाद्य सामग्री मिलने पर पुलिस ने खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दी। इसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बस से सामग्री उतरवाकर जांच की। टीम के अनुसार, बरामद सामग्री में मिल्क केक के 30 डिब्बे, करीब छह क्विंटल मावा और 15 क्विंटल बर्फी शामिल थी। बर्फी दस-दस किलो के पैकेट में रखी थी। शुरुआती जांच में बर्फी और मावे में मिलावट की आशंका जताई गई। इसके अलावा करीब 50 किलो हींग और हींग बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बरामद हुई। दस्तावेज नहीं दिखा सका बस स्टाफ खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बस स्टाफ से खाद्य सामग्री से संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन वे कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके। मिलावट की आशंका के आधार पर टीम ने सामग्री जब्त कर ली। विभाग के अनुसार, बरामद खाद्य पदार्थों की अनुमानित कीमत करीब 12 लाख रुपये है। पुलिस ने स्लीपर बस को सीज कर दिया। नमूने लेकर गड्ढे में नष्ट कराई सामग्री खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मावा, मिल्क केक, बर्फी और हींग के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे। इसके बाद अधिकारियों की मौजूदगी में जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर बरामद सामग्री नष्ट करा दी गई। कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वितीय विनोद कुमार शर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसएस निरंजन सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। धौलपुर, ग्वालियर और मुरैना से लाई जा रही थी सामग्री खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वितीय विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि बस से बरामद मावा, मिल्क केक और बर्फी धौलपुर, ग्वालियर और मुरैना से लाई जा रही थी। शुरुआती जांच में मावा रिफाइंड, मिल्क पाउडर और प्रतिरक्षक मिलाकर बनाए जाने की आशंका सामने आई है। उन्होंने बताया कि बरामद हींग में कुछ मात्रा असली हींग की थी, जबकि शेष सामग्री में हींग बनाने में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी और करीब 700 लीटर रसायन मिला। सभी सामग्री के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।