हैलट जच्चा-बच्चा अस्पताल में ऑस्टियोपोरोसिस के प्रति जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से बोन मिनरल डेंसिटी ( बीएमडी) जांच का आयोजन किया गया। शिविर में 120 लोगों में से 75 की हड्डी कमजोर निकली। सात लोगों में गठिया मिली और 37 लोगों की हड्डी सामान्य थी। ऑर्थोपेडिक विभाग के डॉ. प्रग्नेश ने कहा कि 75 लोगों की में ऑस्टियोपीनिया यानि ऑस्टियोपोरोसिस से पहले की स्थिति मिली है, जो इशारा कर रही है कि आपकी हड्डियां कमजोर हो रही हैं। इसलिए अपनी डाइट सुधारें। व्यायाम करें। कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस की स्थिति में हड्डियां बहुत कमजोर और भुरभुरी हो जाती है, जिससे मामूली चोट या गिरने पर फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. प्रतिमा वर्मा एवं डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि बढ़ती उम्र, रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव, परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस या फ्रैक्चर का इतिहास, कम वजन, कैल्शियम एवं विटामिन-डी की कमी, शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, अधिक शराब का सेवन तथा लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को बढ़ा सकते हैं। डाइट में दूध जरूर शामिल करें और वे लोग जिन्हें दूध या दूध से बने उत्पादों से एलर्जी है तो वो कैल्शियम की पूर्ति के लिए बीज भी ले सकती हैं। इस मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी, डॉ. नीना गुप्ता डॉ. फरहीन सिद्दीकी, डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. पाविका लाल, डॉ. दिव्या द्विवेदी, डॉ. सीमा निगम आदि मौजूद रहीं।