पीडीडीयू नगर जिले में एक ओर जहां प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के लिए कागजी दावे और अभियान चलाए जा रहे हैं, अमृत सरोवर में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर 15 से अधिक पुराने और ऐतिहासिक कुएं देखरेख के अभाव में कूड़ा-करकट, मिट्टी और पूजा सामग्री से पाट दिए गए हैं। कहीं झाड़-झंखाड़ और पेड़ उग आए हैं, तो कहीं ये कुएं हादसों को दावत दे रहे हैं।