हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शुक्रवार को फीस वृद्धि के खिलाफ विद्यार्थियों का विरोध तेज हो गया। विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने प्रदर्शन करते हुए हाल ही में बढ़ाए गए शुल्कों को वापस लेने की मांग उठाई। प्रदर्शन का नेतृत्व एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई ने किया। एसएफआई ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा शुल्क, छात्रावास शुल्क, पुनर्मूल्यांकन शुल्क, मरम्मत शुल्क समेत कई मदों में भारी वृद्धि की है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कहा कि हिमाचल जैसे राज्य में अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण और किसान-मजदूर परिवारों से आते हैं और ऐसी स्थिति में लगातार बढ़ती फीस उच्च शिक्षा को महंगा बना रही है। एसएफआई विश्वविद्यालय इकाई सचिव मुकेश कुमार और उपाध्यक्ष आशीष ने प्रशासन पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने प्रशासनिक और वित्तीय संकट का बोझ छात्रों पर डाल रहा है। छात्र नेताओं ने हालिया कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में करीब 186 शिक्षकों की नियुक्तियों और पदोन्नतियों में अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बढ़ाए गए सभी शुल्क तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं तथा विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रबंधन और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। यदि प्रशासन ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को विश्वविद्यालय स्तर से राज्यव्यापी स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।