मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने अमृतसर गए फतेहगढ़ गुजरां के बुजुर्ग चमन लाल रास्ता भटककर बिहार के गया पहुंच गए। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें न अपने साथियों का पता याद था और न घर का। याद था तो सिर्फ अपने गांव का नाम- फतेहगढ़ गुजरां। यही अधूरी जानकारी आठ दिन बाद उन्हें परिवार तक पहुंचाने की कड़ी बनी। गया के युवक नीरज ने पहले गूगल मैप पर गांव तलाशा, लेकिन सही लोकेशन नहीं मिली। इसके बाद इंटरनेट और चैटजीपीटी की मदद से गांव का सुराग मिला और शनिवार को नीरज खुद बुजुर्ग को लेकर लुधियाना पहुंच गए।