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नशामुक्त पंजाब के दावों पर उठे सवाल, आप पार्षद ने खोली पोल

पंजाब में नशे के खिलाफ ‘युद्ध’ को शुरू हुए डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन नशे के पूरी तरह खात्मे को लेकर सरकार के दावों पर सवाल लगातार उठ रहे हैं। शुक्रवार को जगराओं के वार्ड नंबर-16 स्थित मोहल्ला धुम्मन में पुलिस द्वारा चलाए गए CASO ऑपरेशन के दौरान ऐसा ही एक मामला सामने आया, जब पुलिस ने पूरे मोहल्ले को सील कर घर-घर तलाशी अभियान चलाया। पुलिस टीमों ने संदिग्ध लोगों के घरों में बेडरूम से लेकर रसोई और बाथरूम तक खंगाले, लेकिन कार्रवाई के दौरान कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर मोहल्ले के कुछ लोगों ने सवाल उठाते हुए कहा कि CASO ऑपरेशन की भनक पहले ही लग जाती है। लोगों का आरोप था कि जिन लोगों द्वारा नशा बेचा या इस्तेमाल किया जाता है, वे पुलिस कार्रवाई से पहले ही अपना काम समेट लेते हैं। लोगों ने कहा कि जब पुलिस सुबह के समय या 11-12 बजे मोहल्ले में पहुंचती है तो संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी चीजें पहले ही हटाई जा चुकी होती हैं। ऐसे में केवल घरों की तलाशी लेने से नशे पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल है। ‘एक महीने पहले मोहल्ला गांधी नगर बन गया था’ इस कार्रवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस समय शुरू हुई जब वार्ड के AAP पार्षद कर्मजीत कैंथ ने अपने ही मोहल्ले की स्थिति को लेकर बड़ा बयान दे दिया। पार्षद ने कहा कि करीब एक महीने पहले उनके मोहल्ले का हाल बेहद खराब था और स्थिति ऐसी थी कि उनका मोहल्ला ‘गांधी नगर’ बन गया था। हालांकि अब हालात ठीक होने की बात उन्होंने कही। पार्षद के इस बयान ने पुलिस और सरकार के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें जगराओं समेत पंजाब को नशामुक्त करने का दावा किया जाता रहा है। यदि एक निर्वाचित AAP पार्षद के अनुसार उसके वार्ड में कुछ समय पहले नशे की स्थिति इतनी खराब थी कि वह मोहल्ले की तुलना ‘गांधी नगर’ से कर रहे हैं, तो फिर नशामुक्ति के दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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