लखनऊ के पारंपरिक और स्थानीय खाद्य उत्पादों को देश-विदेश के बाजार तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। मंगलवार को विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक जनपद-एक व्यंजन (ओडीओपी) योजना के तहत कार्यशाला एवं बैठक हुई। इसमें रेवड़ी, आम उत्पाद, चाट और मलाई मक्खन से जुड़े उद्यमियों, कारीगरों और निर्यातकों को योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी गई। बैठक में उपायुक्त उद्योग अभिजीत गौतम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि योजना का उद्देश्य स्थानीय और पारंपरिक खाद्य उत्पादों से जुड़े उत्पादकों, हलवाइयों, कारीगरों और उद्यमियों को मार्केटिंग, ब्रांडिंग और निर्यात के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। इससे उत्पादकों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिल सकेगा। योजना के तहत चयनित व्यंजनों से संबंधित नए उद्यम और विस्तार से जुड़े उद्योग, सेवा एवं व्यवसाय लाभ ले सकेंगे। आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है, जबकि शैक्षिक योग्यता की कोई बाध्यता नहीं है। 25 लाख रुपये तक की परियोजना लागत वाली इकाइयों को परियोजना लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम 6.25 लाख रुपये, जो भी कम हो, मार्जिन मनी के रूप में दी जाएगी। इससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं पर भी निर्धारित चरणों में सब्सिडी का प्रावधान है। इसके अलावा स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के फूड मेला, फूड हाट, व्यापार मेला और प्रदर्शनियों में भाग लेने पर होने वाले खर्च की अनुदान के जरिए प्रतिपूर्ति भी अनुमन्य होगी। बैठक में खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने एफएसएसएआई लाइसेंस, सही लेबलिंग, गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस और गुड हाइजीन प्रैक्टिस के साथ खाद्य लाइसेंस व पंजीकरण की जानकारी दी। बैठक में जिला विकास अधिकारी, अग्रणी जिला प्रबंधक, उपायुक्त श्रम, उद्यान अधिकारी, उद्यमी, कारीगर और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।