फैजुल्लागंज में बाढ़ ने बच्चों की मजबूरी का ठिकाना भी बदल दिया। जो बच्चे पहले सड़कों और गलियों में फेंकी गई प्लास्टिक की बोतलें और कबाड़ बीनते थे, अब वही सामान पानी में उतरकर तलाश रहे हैं। इनके लिए यह कचरा नहीं, पेट भरने का जरिया है। बाढ़ के पानी में भी दो जून की रोटी की तलाश जारी है।