गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आनंद अनुभूति वेलफेयर सोसाइटी की ओर से संस्कृत के महाकवि भास द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक ‘कर्णभारम्’ का हिंदी में मंचन किया गया। कलाकारों ने महाभारत युद्ध के 16वें दिन की कथा के माध्यम से दानवीर कर्ण के जीवन, संघर्ष, त्याग और कर्तव्य के द्वंद्व को मंच पर सजीव किया। नाटक में आचार्य द्रोण के वीरगति प्राप्त करने के बाद कर्ण को कौरव सेना का प्रधान सेनापति बनाए जाने का प्रसंग दिखाया गया। रणभूमि की ओर जाते समय कर्ण और उनके सारथी, मद्रदेश के राजा शल्य के बीच संवाद के जरिए कर्ण की मनःस्थिति को दर्शाया गया। अपने ही भाइयों यानी पांडवों के विरुद्ध युद्ध करने के कारण कर्ण के मन में चल रहे द्वंद्व को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।