जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर मंगलवार को पौनी कस्बे में सिख समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने पैदल रैली निकाली। मुख्य बाजार स्थित गुरुद्वारा साहिब से शुरू हुई इस रैली में महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर पंजाबी भाषा को आधिकारिक मान्यता देने की मांग उठाई और सरकार से इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की। रैली के दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान दीदार सिंह ने कहा कि पंजाबी भाषा को आधिकारिक दर्जा दिलाने के उद्देश्य से सभी लोगों के सहयोग से ज्ञापन भी सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा सिख समुदाय की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अहम हिस्सा है। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं से जुड़ी इस भाषा का संरक्षण करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को पंजाबी भाषा का ज्ञान नहीं होगा, तो वे अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत को सही ढंग से कैसे समझ पाएंगी। भाषा किसी भी समुदाय की पहचान होती है, इसलिए इसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। दीदार सिंह ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार से अपील की कि पंजाबी भाषा को जल्द से जल्द आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा को उचित सम्मान और मान्यता मिलने से इसके संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और युवा पीढ़ी भी अपनी मातृभाषा से जुड़ी रहेगी। रैली में शामिल लोगों ने भी पंजाबी भाषा को आधिकारिक मान्यता देने की मांग का समर्थन करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी और उनकी मांग को पूरा करने के लिए सकारात्मक पहल करेगी।