बुद्ध जयंती पर शुक्रवार को हिमालयन बुद्धिस्ट सोसायटी और अन्य संगठनों ने बुद्धिस्ट गोंपा मनाली में कार्यक्रम का आयोजन किया। इससे पूर्व लामाओं ने मालरोड पर बौद्ध ग्रंथों की आकर्षक झांकियां निकालीं। गोंपा में दिनभर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त कुल्लू अनुग चंद्र ने ब्रार मुख्य अतिथि शिरकत की। एसडीएम गुंजीत सिंह चीमा भी समारोह में मौजूद रही।लाहौल-स्पीति की पिन वैली के कुंगरी गोंपा से पहुंचे बौद्ध भिक्षुओं ने मुखौटे पहनकर परंपरागत छम नृत्य प्रस्तुत किया। इसे सभी ने पसंद किया। यह नृत्य नकारात्मक शक्तियों को भगाने और लोगों की सुख-समृद्धि के मकसद से किया जाता है। इसके अलावा अन्य कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। लाहौली, नेपाली और लद्दाख का लोकनृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा स्कूली छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सोसाइटी की ओर से बौद्ध धर्म के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्य सराहनीय है। उन्होंने कहा कि सभी को महात्मा बुद्ध की जीवनी और उन के उपदेशों का अनुसरण करना चाहिए। सोसाइटी के संयोजक रूप सिंह ठाकुर ने कहा कि मनाली में हर साल बुद्ध पूर्णिमा का आयोजन धूमधाम से मनाया जाता है। यह 2570वीं जयंती है। उन्होंने बताया कि छम नृत्य का अभिप्राय दैत्य बनकर दैत्यों का वध करना माना जाता है। उन्होंने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह मानव जीवन को सही दिशा देने वाला प्रेरणादायक अवसर भी है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और संतुलन में निहित है। सोसायटी के अध्यक्ष अशोक ठाकुर ने कहा कि बौद्ध गोंपा को शांति स्थल के रूप में विकसित करना है। उन्होंने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के अनुसार अहिंसा के मार्ग पर चलने तथा विश्व शांति एवं कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान किया। विद्वान टशी पलजोर ने महात्मा बुद्ध की ओर से बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।