पर्यावरण संरक्षण के साथ पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के मंगलौत वन क्षेत्र की निहारी वन बीट के दधोल कलां में पौधरोपण किया गया। 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव के तहत पांच हेक्टेयर वन भूमि पर करीब एक हजार पौधे रोपे गए हैं। इनमें लगभग 350 सहजन यानी मोरिंगा के पौधे शामिल हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 14 अगस्त को सहजन का पौधा रोपित कर वन महोत्सव का शुभारंभ किया था। डिमार्केटेड प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट (डीपीएफ) के अंतर्गत आने वाले इस वन क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपकर हरित आवरण बढ़ाने का प्रयास किया गया है। अभियान में मोरिंगा को शामिल करने का उद्देश्य लोगों को इसके पोषण संबंधी महत्व से परिचित करवाने के साथ पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करना है। सहजन के नाम से पहचाना जाने वाला मोरिंगा एक बहुउपयोगी पौधा है। इसकी फलियों से सब्जी बनाई जाती है और दक्षिण भारतीय व्यंजनों में सांभर तैयार करने के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। इसके पत्तों को भी विभिन्न खाद्य पदार्थों में शामिल किया जाता है। पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण सहजन को दैनिक आहार का उपयोगी हिस्सा माना जाता है। पौधे के विभिन्न हिस्सों का पारंपरिक रूप से भी इस्तेमाल होता रहा है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि मोरिंगा में लगभग 17 प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं और इसे ‘मैजिक प्लांट’ भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि इसके पत्ते, फूल और फलियां विभिन्न रूपों में उपयोगी हैं। इसकी फलियों से सब्जी बनाई जाती है और सांभर में भी इसका इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय वन महोत्सव के माध्यम से मोरिंगा के पौधे लगाकर लोगों को इसके महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया है। लोगों को अपने आसपास सहजन के पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि वे इसके पोषण संबंधी उपयोगों को समझने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकें।