यमुनानगर। मुकुंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा प्रभावित होने से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को कई मरीजों के परिजनों ने अल्ट्रासाउंड नहीं होने पर अस्पताल में रोष जताया। गर्भवती महिलाओं के परिजनो का आरोप है कि वह कई दिनों से अपनी गर्भवती पत्नियों को लेकर अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार कोई न कोई कारण बताकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। परिजनों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर अल्ट्रासाउंड करवाना जरूरी होता है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में उन्हें कई दिनों से सुविधा नहीं मिल पा रही है। कभी स्टाफ उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है तो कभी कंप्यूटर में खराबी का हवाला देकर अल्ट्रासाउंड नहीं किया जाता। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को लेकर अस्पताल आने-जाने में उन्हें काफी परेशानी हो रही है। मंगलवार को भी कई मरीज सुबह ही अस्पताल पहुंच गए थे। परिजनों का कहना था कि वे सुबह से अल्ट्रासाउंड करवाने के इंतजार में बैठे रहे, लेकिन दोपहर तक जांच नहीं हो सकी। लंबे समय तक इंतजार करने के बाद मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी बढ़ गई। उनका कहना था कि सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को यदि जांच के लिए भी बार-बार चक्कर काटने पड़ें तो परेशानी और बढ़ जाती है। मरीजों के परिजन अपनी शिकायत लेकर मुकुंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के पीएमओ डॉ. विपुल गोयल के पास भी पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के सामने अल्ट्रासाउंड सुविधा नियमित रूप से शुरू करवाने की मांग रखी, ताकि मरीजों को परेशान न होना पड़े। गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी अल्ट्रासाउंड की सुविधा प्रभावित होने का सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। परिजनों का कहना है कि जांच के लिए उन्हें कई बार अस्पताल आना पड़ रहा है। गर्भावस्था की स्थिति में घंटों इंतजार और बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाना महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। सुबह से बैठे रहे मरीज मरीजों के अनुसार मंगलवार को कई लोग सुबह ही जिला अस्पताल पहुंच गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि दोपहर से पहले अल्ट्रासाउंड हो जाएगा, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी जांच नहीं हुई। इसके चलते मरीजों और परिजनों ने रोष जताया। कभी स्टाफ तो कभी कंप्यूटर खराब परिजनों का आरोप है कि अल्ट्रासाउंड नहीं होने पर उन्हें अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं। कभी स्टाफ नहीं होने की बात कही जाती है तो कभी कंप्यूटर में खराबी का हवाला दिया जाता है। इससे मरीजों को स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।