सरगथल गांव में स्थित खो-खो नर्सरी में पांच गांवों के बच्चे व युवा पसीना बहा रहे हैं। नर्सरी में विभिन्न गांवों के 80 खिलाड़ी अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं, जिनमें 30 लड़कियां भी शामिल हैं। खिलाड़ियों की मेहनत और लगातार परिश्रम उनकी प्रतिभा को पहचान भी दे रहा है। नर्सरी के 40 खिलाड़ी अलग-अलग आयु वर्ग में राज्य स्तरीय टीम का हिस्सा हैं। वहीं तीन खिलाड़ी नेशनल स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों की खेलों के प्रति रूचि बढ़ाने और उनकी खेल प्रतिभा को निखारने के लिए ग्राम स्तर पर खेल नर्सरियां आवंटित की हुई हैं। सरगथल गांव में राजकीय स्कूल में खो-खो नर्सरी आवंटित हुई है। क्षेत्र के युवाओं की पहली पसंद कुश्ती और कबड्डी रहती है। ऐसे में सरगथल गांव में खो-खो की नर्सरी आवंटित होने के बाद बच्चे और युवा खो-खो खेल में भी रूचि लेने लगे हैं। नर्सरी में गांव के साथ-साथ रोलद, दोदवा, जौली, कासंडा आदि गांवों से भी खिलाड़ी अभ्यास करने के लिए आते हैं। खेल के प्रति बच्चों की रूचि को देख ग्रामीण भी भरपूर सहयोग कर रहे हैं। नर्सरी में ग्रामीणों द्वारा आवश्यक सामान उपलब्ध करवाया जाता है। वहीं स्कूल के प्राचार्य विवेकानंद खिलाड़ियों को किट व प्रतियोगिताओं में आने-जाने की व्यवस्था करवाते हैं। खो-खो खेलकर गांव के करीब 20 युवा विभिन्न सरकारी नौकरियां पा चुके हैं। वहीं, गांव की बेटी बिंदू मलिक खो-खो में वर्ष 2023 में एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। फिलहाल अंडर 11 आयु वर्ग में नर्सरी की टीम जिला स्तर पर प्रथम रही है। वहीं अंडर 14 व 19 में नर्सरी के खिलाड़ी स्कूल स्टेट गेम्स में कांस्य तथा अंडर 17 आयु वर्ग में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। कोच नितेश का कहना है कि नर्सरी में खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर पदक जीते सकें।