जींद। आंगनबाड़ी केंद्रों के खर्चों का भुगतान नहीं होने और मानदेय बकाया रहने से नाराज आंगनबाड़ी वर्करों व हेल्परों ने वीरवार को लघु सचिवालय के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया। आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन की जींद कमेटी के आह्वान पर हुए प्रदर्शन में कर्मचारियों ने विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग उठाई। धरने का संचालन करते हुए जिला सचिव दयावंती ने आरोप लगाया कि डीपीओ उनकी समस्याएं नहीं सुनतीं और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। उनका कहना था कि केंद्रों के जरूरी खर्चों का भुगतान समय पर नहीं होने से उन्हें अपनी जेब से पैसे लगाने पड़ रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों का ईंधन खर्च वर्ष 2023 से बकाया है। कई केंद्रों का किराया करीब एक साल से लंबित है, जबकि बिजली बिल भी वर्कर अपनी जेब से भर रही हैं। ड्रेस का पैसा नहीं मिलने की शिकायत करते हुए उन्होंने कहा कि दूसरे जिलों में इसका भुगतान दो बार हो चुका है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का प्रोत्साहन वर्ष 2017 के बाद से नहीं मिलने का आरोप भी लगाया गया। इसके अलावा पोषण ट्रैकर, फोन रिचार्ज और अन्य मदों का भुगतान लंबित बताया गया। जींद ग्रामीण क्षेत्र की वर्करों का मानदेय भी तीन महीने से लंबित बताया गया। उन्होंने अधिकारियों से इन समस्याओं का समाधान करने की मांग की। इस अवसर पर विकास, सुमन, सुंदरेश, बबीता, लखपति, लक्ष्मी, उर्मिला, अंजू, ऊषा, मनीषा, कमलेश और सुनीता मौजूद रही। बाक्स मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा तेज राज्य कमेटी की चेयरमैन जगमति मलिक ने कहा कि यदि वर्करों और हेल्परों की जायज मांगें पूरी नहीं हुईं तो उन्हें लंबा आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा। जागरूक नागरिक मंच ने भी धरने का समर्थन किया। मंच के संयोजक सुधीर शास्त्री ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को समय पर ईंधन और अच्छी गुणवत्ता की खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध छोटे बच्चों के पोषण से है।