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झज्जर के बेरी में राधा अष्टमी पर माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

विश्व प्रसिद्व माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में राधा अष्टमी के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालु माता के दरबार में नवरात्र के अलावा हर माह की अष्टमी पर पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं । मां के दरबार में अलसुबह से भक्तों की लाइन में लगनी शुरू हो गई थी। सुबह करीब 5 बजे मां को अंदर वाले दरबार से बाहर वाले भवन में लाया गया। जहां पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ स्नान करवाया और मंगला आरती करने के बाद भक्तों के दर्शन के लिए कपाट खोल दिए। मंदिर के पुजारी कुलदीप वशिष्ठ ने बताया कि हर माह की अष्टमी के दिन मां के दरबार भक्तों की भीड़ उमड़ती है। महिलाओं ने मां के मंदिर में पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर मन्नत मांगी। मां के दरबार में भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसको लेकर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। बेरी शहर चौकी प्रभारी पीएसआई सागर का कहना है कि माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में हर माह की अष्टमी के दिन हरियाणा, दिल्ली समेत आसपास के श्रद्धालु माता के मंदिर दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। अति प्राचीन है मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास मां भीमेवरी देवी मंदिर का इतिहास अति प्राचीन है। विद्वानों के अनुसार मां की मूर्ति को पांडु पुत्र भीम पाकिस्तान के हिंगजाल पर्वत से लेकर आए थे । भीम ने मां को अपने साथ चलने के लिए कहा तो मां ने पांडु पुत्र से कहा कि मैं तुम्हारे साथ तो चलूंगी , लेकिन तुम मुझे अपनी गोद में रखोगे । रास्ते में जहां भी उतारोगे मैं उस स्थान से आगे नहीं जाऊंगी । भीम ने मां का कहना माना और गोद में उठाकर युद्ध भूमि की तरफ चल पड़ा । जब भीम मां को लेकर बेरी कस्बे से गुजर रहा था तो भीम को लघु शंका के लिए उन्हें अपने कंधे से उतार दिया । बाद में माता को वापस चलने के लिए अपनी गोद में उठाने लगा तो वह नहीं उठ पाई । तभी मां भीमेश्वरी की यहां स्थापना हुई और महाभारत के युद्ध के बाद यहां मंदिर की स्थापना कर दी गई ।

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