शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्म दिवस के अवसर पर अनाज मंडी में किसानों और मजदूरों का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। ''पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति हरियाणा'' के बैनर तले आयोजित जिला स्तरीय महापंचायत में सैकड़ों किसानों, मजदूरों, और युवाओं ने भाग लिया। महापंचायत की अध्यक्षता जिला प्रधान ओमप्रकाश हसंगा और उप प्रधान गग्गी चहल ने की, जबकि मंच संचालन सुखचैन सिंह और महेंद्र मोची ने किया। वही इसके बाद महापंचायत के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम 17 सूत्रीय मांग पत्र तहसीलदार को सौंपा गया महापंचायत को संबोधित करते हुए वरिष्ठ किसान नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे हमले बोले। मुख्य रूप से धान खरीद में लगाई गई शर्तों को हटाने, डीएपी खाद की उपलब्धता और अन्य स्थानीय समस्याओं के समाधान पर जोर दिया गया। किसान नेता व पगड़ी संभाल जट्टा के प्रदेश अध्यक्ष व मुख्य वक्ता मनदीप नथवान ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मंडियों में धान खरीद सुचारू रूप से नहीं हुई, तो किसान दिल्ली हाईवे जाम करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि धान खरीद पर लगाई गई 28 क्विंटल प्रति एकड़ की अनाप-शनाप शर्त किसानों को स्वीकार्य नहीं है। वरिष्ठ नेता कुलवंत सिंह संधू ने सरकार पर ट्रेड डील के नाम पर देश को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने का आरोप लगाया। किसान नेता मनदीप ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि नमी की सीमा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत की जाए। दूसरे राज्यों से धान आने पर रोक लगे। धान कटाई के समय कंबाइन पर समय अवधि की पाबंदी हटे ,धान खरीद पर 28 क्विंटल प्रति एकड़ की शर्त तुरंत हटाई जाए। ट्यूबवेल कनेक्शन बिना शर्त जारी किए जाएं। जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर उचित मुआवजा दिया जाए। डीएपी और यूरिया खाद का पर्याप्त प्रबंध हो। खाद के साथ अन्य सामान देने की शर्त बंद हो। नहरों में टेल तक पर्याप्त पानी छोड़ा जाए। मनरेगा के तहत 200 दिन काम की गारंटी मिले। बेरोजगार नौजवानों को रोजगार दिया जाए। कच्चे कर्मचारियों और गेस्ट टीचरों को पक्का किया जाए। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में शिक्षकों और डॉक्टरों की व्यवस्था की जाए। नशे और गुंडागर्दी पर सख्त रोक लगे। सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार बंद किया जाए। नकली दूध और डेयरी उत्पादों पर नकेल कसी जाए। बिजली के निजीकरण और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद हो। गरीब परिवारों को 100-100 गज के प्लॉट दिए जाएं।महापंचायत में प्रदेश भर से किसान संगठनों की शीर्ष लीडरशिप शामिल हुई, जिसमें लवी बाठ, सुरेश गढ़वाल, कर्मजीत सिंह सालमखेड़ा, रामपाल, गुरलाल नथवान, नाहर सिंह, कमल बराड़, सूखा भण्डाल, मंजीत पूर्णमाजरा, बलविंदर ललौदा, लाभ सिंह, हरविंदर बेनीपाल, कपिल, सतपाल खाबड़ा, अंबाला से अमरजीत सिंह मोहड़ी, पेहवा से प्रिंस वड़ैच, हिसार से सतीश बेनीवाल, सरपंच कंवलजीत कौर, मैक्स साहूवाल, रणजीत गिल (चढूनी), और रविन्द्र सिंह हिजरावां सहित बड़ी संख्या में किसान-मजदूर उपस्थित रहे।अध्यक्ष मनदीप सिंह और अन्य वक्ताओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को तेज किया जाएगा और स्टेट हाईवे जाम किया जाएगा।