बिजली वितरण में समानांतर संचालन की मंजूरी को लेकर इनेलो के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व गृह मंत्री प्रो. संपत सिंह ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) के फैसले को खत्म करवा सकती है। इसके लिए सरकार को आगे अपील करने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। वर्ष 2003 के एक्ट के तहत सरकार जनहित के मुद्दे पर आयोग को लिखित निर्देश दे सकती है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संपत सिंह ने कहा कि ऊर्जा मंत्री अनिल विज चाहें तो वह इस मुद्दे पर बिजली कर्मचारियों की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि फैसले के खिलाफ आगे अपील करने की बात करना महज दिखावा है। सरकार आयोग को सीधे एडवाइजरी जारी कर सकती है कि समानांतर बिजली संचालन का मामला जनहित से जुड़ा है और इस आदेश को खत्म किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इसके बाद नियमानुसार आयोग को फैसला खत्म करना पड़ेगा। संपत सिंह ने कहा कि बिजली कर्मचारियों के साथ इनेलो पार्टी संघर्ष करेगी। कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के बाद पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी। उन्होंने समानांतर बिजली संचालन की मंजूरी को लेकर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस फैसले का असर बिजली व्यवस्था और कर्मचारियों के हितों पर पड़ेगा। एक करोड़ की पूंजी वाली कंपनी को 4700 करोड़ की जिम्मेदारी संपत सिंह ने समानांतर बिजली संचालन की मंजूरी पाने वाली इलेवन पावर कंपनी की वित्तीय क्षमता और अनुभव पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब एक करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनी को 4700 करोड़ रुपये की जिम्मेदारी सौंप दी गई, जबकि इस क्षेत्र में कंपनी के पास पर्याप्त अनुभव भी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इलेवन पावर कंपनी के पीछे केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल का हाथ है। संपत सिंह ने कहा कि वह अपने आरोप के समर्थन में पुख्ता सबूत भी देंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने से पहले कंपनी की वित्तीय क्षमता और अनुभव का आकलन किस आधार पर किया गया। संपत सिंह ने कहा कि बिजली कर्मचारियों के मुद्दे पर इनेलो उनके साथ खड़ी रहेगी। हड़ताल के बाद पार्टी स्थिति की समीक्षा कर अगला कदम उठाएगी।