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मसूरी: पांडवाज की प्रस्तुतियों ने शरदोत्सव की शाम को बनाया यादगार

मसूरी । शरदोत्सव के तहत टाउन हॉल में आयोजित सांस्कृतिक संध्या उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और संगीत की अनूठी छटा से सराबोर रही। पद्मश्री बसंती बिष्ट के जागरों और इसके बाद पांडवाज टीम की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। लोकधुनों और पारंपरिक संगीत पर दर्शक झूमते नजर आए । स्टार नाइट कार्यक्रम का आगाज पद्मश्री बसंती बिष्ट और उनकी टीम की जागर प्रस्तुति से हुआ। बसंती बिष्ट ने अपनी विशिष्ट और प्रभावशाली शैली में देव जागरों की प्रस्तुति देकर उत्तराखंड की प्राचीन लोकपरंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया। उनके जागरों में देवी-देवताओं के आह्वान, पहाड़ की आस्था और लोकविश्वास की गहरी झलक देखने को मिली। इसके बाद पांडवाज टीम ने अपनी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्या में रंग भर दिया। टीम ने स्वर्गारोहिणी, म्योलड़ी, नन्दा तेरो डोला, केदारनाथ, मण्डाण, वीं तैं पतै ना, जांदूरी, गणपति, पाना पनूली, बाडुली, घुघुती, फुलारी, ऐगेनी फुलारी, शकुना दे, यकुलाँस, तिलगा, उतरैणी, उत्तराखण्ड, संध्या झूली, बूती जाली तोर, रामगंगा, सर कुमेली, जीतू बगड्वाल, गाजीणा, राधा और हुराणी को दिन जैसे गीतों की प्रस्तुति दी। लोकधुनों और पारंपरिक संगीत के साथ कलाकारों ने अपनी ऊर्जा और बेहतरीन तालमेल से दर्शकों को देर तक बांधे रखा। खासकर उत्तराखंड की लोकपरंपराओं, देवी-देवताओं, पहाड़ी जीवन और प्रकृति से जुड़े गीतों पर दर्शक उत्साह से झूमते नजर आए। पांडवाज की प्रस्तुति ने शरदोत्सव की सांस्कृतिक शाम को यादगार बना दिया। पांडवाज टीम के प्रस्तुति देने वाली टीम में ईशान, श्रेष्ठ, शिवानी भागवत, सुशान्त, गौरव, अनिरुद्ध, राकेश, अंशुल, सृष्टि, शिवानी, सिद्धार्थ, आदित्य, कुणाल, सलिल, ऋषि, श्रेय, विमल, उदित और बण्टी शामिल रहे। टीम के सदस्यों ने सामूहिक रूप से अपनी प्रस्तुतियों के जरिए उत्तराखंड की लोक विरासत और संगीत की समृद्ध परंपरा को मंच पर जीवंत किया।

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