कड़कड़ाती ठंड में बेघर और बेसहारा लोगों को राहत देने के चंडीगढ़ प्रशासन के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आए। जमीनी हकीकत यह है कि रैन बसेरों में ठहरने वाले लोग बदबूदार कंबलों और गंदगी के बीच रात काटने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि कई जगह कंबल ओढ़ना सुकून नहीं, बल्कि एक मजबूरी बन गया है। अमर उजाला की विशेष पड़ताल में शहर के रैन बसेरों की पोल खुली है।