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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court: Naming is the fundamental right of citizens, not allowing change is arbitrary

Allahabad High Court : नाम चुनना नागरिक का मूल अधिकार, बदलाव की अनुमति न देना मनमानी

Wed, 31 May 2023 10:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 31 May 2023 10:14 AM IST
सार

कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव के आदेश को रद्द करते हुए परिवर्तित नाम से हाई स्कूल व इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने भारत सरकार के गृह सचिव व प्रदेश के मुख्य सचिव को भी इस संबंध में लीगल फ्रेम वर्क तैयार करने का आदेश दिया है।

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Allahabad High Court: Naming is the fundamental right of citizens, not allowing change is arbitrary
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि धर्म या जाति के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपना नाम चुनने या बदलने का मौलिक अधिकार है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)ए, अनुच्छेद 21 व अनुच्छेद 14 के अंतर्गत सभी नागरिकों को प्राप्त है। इसे प्रतिबंधित करने का नियम मनमाना और संविधान के विपरीत है।

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कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव के आदेश को रद्द करते हुए परिवर्तित नाम से हाई स्कूल व इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने भारत सरकार के गृह सचिव व प्रदेश के मुख्य सचिव को भी इस संबंध में लीगल फ्रेम वर्क तैयार करने का आदेश दिया है।न्यायमूर्ति अजय भनोट ने एमडी समीर राव की याचिका को स्वीकार करते हुए इंटरमीडिएट रेग्यूलेशन 40 को अनुच्छेद-25 के विपरीत करार दिया है।
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यह नाम बदलने की समय सीमा व शर्तें थोपती है। कोर्ट ने सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद के 24 दिसंबर 2020 को जारी आदेश को रद्द कर दिया है। सचिव ने इस आदेश में याची के हाई स्कूल व इंटरमीडिएट प्रमाण पत्र में नाम परिवर्तित करने की मांग खारिज कर दी थी। कोर्ट ने याची का नाम शहनवाज के स्थान पर एमडी समीर राव करके नया प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

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कोर्ट ने पुराने नाम के सभी दस्तावेज जमा करने का याची की दिया आदेश

कोर्ट ने याची को पुराने नाम के सभी दस्तावेज संबंधित विभागों में जमा करने का निर्देश दिया है, ताकि पुराने दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल न हो सके। कोर्ट ने भारत सरकार के गृह सचिव व प्रदेश के मुख्य सचिव को इस संबंध में लीगल फ्रेम वर्क तैयार करने का भी आदेश दिया है।

इस मामले में याची ने धर्म परिवर्तन करके अपना नाम बदलने की बोर्ड को अर्जी दी थी। बोर्ड सचिव ने नियमों व समय सीमा का हवाला देते हुए मांग खारिज कर दी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। बोर्ड का कहना था कि नाम बदलने की मियाद तय है। कतिपय प्रतिबंध हैं।

याची ने नाम बदलने की अर्जी देने में काफी देरी की है। कोर्ट ने इसे सही नहीं माना और कहा यदि कोई धर्म या जाति बदलता है तो धार्मिक परंपराओं व मान्यताओं के लिए उसका नाम बदलना जरूरी हो जाता है। उसे ऐसा करने से नहीं रोका जा सकता। यह मनमाना है। किसी को भी अपनी मर्जी से नाम रखने का मूल अधिकार है।

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