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तीन युवकों की मौत से रो उठा गनगोली गांव

Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
Badaun
Badaun Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
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आसफपुर। गांव गनगोली के तीन युवकों की रविवार को बुलंदशहर जिले में हुई सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इसकी खबर जैसे ही गांव में आई तो शोक छा गया। मृतकों के घर पर रोते बिलखते परिजनों को ढांढस बंधाने वालों का तांता लग गया। कल तक गांव की जिन गलियों में युवक बड़े पले थे, आज वहां गमगीन माहौल छाया हुआ था।
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रविवार को गांव गनगोली के नेत्रपाल के पुत्र श्याम सिंह की बारात बुलंदशहर जिले के गांव धारापुर नगला गई थी। गांव के ही राजपाल (24), श्याम लाल (26), अमित (25) व धर्मवीर (21) भी बारात में जा रहे थे। यह चारों युवक दो बाइकों से सवार होकर बारात में जा रहे थे। देर शाम नरौरा बैराज के पास दोनों बाइकें यहां सड़क किनारे पड़े एक तख्त से भिड़ गईं। राजपाल, श्याम लाल और अमित की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि धर्मवीर गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अलीगढ़ अस्पताल में भर्ती कराया गया। इधर, राजपाल, श्याम लाल अैर अमित की मौत की सूचना जैसे ही गांव में आई तो यहां परिजन दहाड़े मार कर रोने लगे। गांव के तमाम लोग उनके घर पहुंच गए और होनी को कौन टाल सकता है कहते हुए परिजनों को ढांढस बंधाने लगे।
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कुदरत ने बेसहारा कर दिया बुजुर्ग मुन्नी को
तीन बेटों और पति की पहले हो चुकी मौत
अब विकलांग सुम्मेरी लाल के सहारे जिंदगी
आसफपुर। एक और जवान बेटा इस दुनिया में नहीं रहा, बूढ़ी मां जिंदगी के आखिरी पड़ाव में यह कैसे बर्दाश्त करे। उसकी जिंदगी का आखिरी सफर अफाहिज बेटे के साथ कैसे कटेगा, इन बेसहारा लोगों का कौन सहारा बनेगा। बुलंदशहर में हुई दुर्घटना में जवान बेटे राजपाल की मौत के बाद यह समस्या गनगोली की बुजुर्ग मुन्नी देवी के सामने आ गई खड़ी है।
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एक समय था जब मुन्नी देवी का भरा पूरा परिवार था। पति के सहारे के साथ उसके चार बेटे थे। करीब चार साल पहले एक के बाद एक बेटे बुधपाल और एहदल की बीमारी के कारण मौत हो गई। इसके बाद पति हप्पू की मौत भी हो गई। अब उसकी जिंदगी का एक ही सहारा बचा था राजपाल। जबकि छोटा बेटा सुम्मेरी अफाहिज होने के कारण राजपाल पर ही निर्भर था। राजपाल जो भी कमाता था, उसी से परिवार को पेट पलता था। रविवार को बुलंदशहर में उसकी मौत हो गई। राजपाल की मौत के बाद बुजुर्ग मुन्नी देवी और अफाहिज सुम्मेरी पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। दोनों को दो वक्त की रोटी कैसे मिलेगी, यही चिंता उन्हें सताए जा रही है।
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