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मेला ककोड़ा में होंगे सुरक्षा का खास इंतजाम

Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
Badaun
Badaun Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्घ मेला ककोड़ा में हर साल लाखों श्रृद्घालु आते हैं। लिहाजा इस बार मेले की सुरक्षा का दारोमदार बदायूं समेत पांच जिलों की पुलिस और पीएसी पर रहेगा।
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पांच किलोमीटर के दायरे में लगने वाले मेला ककोड़ा में श्रृद्घालुओं की सुरक्षा को मेला कोतवाली बनाई जाएगी। इसके साथ ही पूरे मेला परिसर में 39 चौकियां भी बनाई जाएंगी। बदायूं के अलावा बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और कांशीराम नगर से भी फोर्स बुलाया गया है। गोताखोर यूनिट के साथ पीएसी की दो कंपनी भी तैनात रहेंगी। घुड़सवार जवान पूरे मेला परिसर में गश्त करेंगे। तंबुओं के शहर में अग्निकांड की संभावना को देखते हुए दमकल की दो गाड़ियों के साथ फायर यूनिट मुस्तैद रहेगी।
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दर्जनभर वॉच टॉवर से होगी निगरानी
बदायूं। निगरानी को पूरे मेला परिसर में वॉच टॉवर लगेंगे। जिनसे सुरक्षा कर्मी मेले की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। मुख्य घाट और मेन गेट के अलावा मेले में जगह-जगह वॉच टॉवर बनाए जाएंगे।
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रेत की चादर पर बसेगा तंबुओं का शहर
कादरचौक। मेले में तंबू लगाने को शनिवार को आगरा से टेंट का सामान लेकर मजदूर पहुंच गए। लेकिन जंगल सफाई और समतलीकरण का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
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काम पूरा न होने पर कटेगा पैसा
कादरचौक। मेले को महीना भर पहले ही ठेके दे दिए गए थे, लेकिन अभी तक मेले की प्रारंभिक व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं हो सकी हैं। जेई संजय शर्मा ने बताया कि जिन ठेकेदारों ने बीस नवंबर तक काम पूरा नहीं किया उनका दस फीसदी पैसा काट दिया जाएगा।
एडीएम पहुंचे, नहीं मिली कोतवाली
कादरचौक। एडीएम वित्त जयंत कुमार दीक्षित ने शनिवार को मेला स्थल का निरीक्षण किया। व्यवस्थाओं की धीमी गति पर उन्होंने नाराजगी जताई। इस दौरान ठेकेदार ने कोतवाली की व्यवस्था न होने पर सुरक्षा को लेकर शिकायत की। जिला पंचायत के जेई ने ठेकेदार को फटकार लगाई। एडीएम ने सभी व्यवस्था बीस नवंबर से पहले दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
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झंडे बताते हैं तहसीलों और जिलों की बसावट
कादरचौक। रुहेलखंड के मिनी कुंभ में बरेली मंडल के अलावा अन्य जिले के लोग भी आते हैं। जो अपने क्षेत्र के तंबुओं की पहचान ऊंचे झंडे लगाकर बनाते हैं। वहीं पूर्व की दिशा में अधिकांश बरेली, पीलीभीत का मेला ठहरता है। पश्चिम में कुरमियान मेला कहलाता है। गंगा तट पर राजनैतिक तथा वीआईपी कैंप लगाए जाते हैं।
लोग अपने तंबुओं की सजावट रंगोली आदि बनाकर करते हैं। रेत के शहर का लुत्फ ही अलग होता है। चांदनी की रोशनी में जगमगाता तंबुओं का शहर एक मिसाल है। जहां सर्व धर्म समभाव बनता है। तो गंगा मैया की जलधारा में दीपकों की लौ की छटा अनुपम होती है। बच्चों का नंगे पैर रेत पर दौड़ना किलकारी मारना शोभायमान होता है। मेला का स्वरूप अवर्णनीय लगता है।
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मदारी और जादूगर भी अब नहीं आते
कादरचौक। मिनी कुंभ मेला की रौनक महीनों पहले से दिखाई देने लगती थी। आसपास के गांव में भालू, बंदर लेकर मदारी आ जाते थे और महीनों तक गांव-गांव में तमाशा दिखाकर मनोरंजन करते थे। लेकिन अब न ही मदारी आते हैं और न ही जादूगरों का मनोरंजन दिखाई देता है। वहीं कलाबाज भी कला करके लोगों का मनोरंजन नहीं करते हैं। कला का पतन होता जा रहा है। मेले में बाइस्कोप के माध्यम से तंबुओं पर जाकर बच्चों को दिखाया जाता है। वह भी अतीत की बात हो गई है।

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कलाकार करेंगे सरकारी योजनाओं का प्रचार
बदायूं। लखनऊ के कलाकार 26 से 28 नवंबर तक मेले के सांस्कृतिक मंच से सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों को देंगे। इसके अलावा विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। अभी तक दस विभागों की प्रदर्शनी को जगह का आवंटन हो चुका है। इनमें कृषि, दुग्ध, स्वास्थ्य, पशुपालन, सूचना विभाग, मनरेगा, मत्स्य पालन विभाग की प्रदर्शनी लगाई जाएंगी।
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