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पुरातात्विक धरोहरों के पास अतिक्रमण, अफसर बेखबर
Badaun
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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धरोहरों के आसपास 200 मीटर तक है बैन
सिटी रिपोर्टर
बदायूं। शहर के इकलास खां का मकबरा और अलाउद्दीन शाह की मां मखदूनजहां के मकबरों को पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित कर रखा है। इनके आसपास 200 मीटर तक नवनिर्माण और खनन ही नहीं भवनों की मरम्मत भी बिना अनुमति नहीं हो सकती, लेकिन मकबरों से सटकर कई लोगों ने मकान बना लिए। यहां लगे चेतावनी बोर्ड भी दिखावा साबित हो रहे हैं। जिला प्रशासन भी अतिक्रमणकारियों के सामने बौना साबित हो रहा है।
भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने 1992 में अधिसूचना जारी कर इन्हें संरक्षित क्षेत्र घोषित किया था। प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक अवशेष अधिनियम 1959 के उप नियम 32 के तहत लागू कानून के आधार पर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसमें तीन साल का कारावास और पांच हजार तक का जुर्माना हो सकता है, लेकिन कानून का पालन अफसर नहीं करा रहे हैं। यही कारण है कि जवाहरपुरी स्थित इकलास खां और मीरा सराय स्थित मखदूनजहां के मकबरे से सटकर तमाम लोगों ने मकान बना लिए हैं। कुछ का निर्माण चल भी रहा है। जबकि चेतावनी बोर्ड भी लगे हैं।
ऐतिहासिक भवनों के पास अतिक्रमण हटाने के आदेश पुरातत्व विभाग के नहीं मिले हैं। जिन लोगों की अपनी जमीन है वह तो निर्माण करेंगे ही, लेकिन अवैध निर्माण नहीं होने देंगे। बने कानून का भी पालन किया जाएगा।
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- जमीर आलम, सिटी मजिस्ट्रेट
सिटी रिपोर्टर
बदायूं। शहर के इकलास खां का मकबरा और अलाउद्दीन शाह की मां मखदूनजहां के मकबरों को पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित कर रखा है। इनके आसपास 200 मीटर तक नवनिर्माण और खनन ही नहीं भवनों की मरम्मत भी बिना अनुमति नहीं हो सकती, लेकिन मकबरों से सटकर कई लोगों ने मकान बना लिए। यहां लगे चेतावनी बोर्ड भी दिखावा साबित हो रहे हैं। जिला प्रशासन भी अतिक्रमणकारियों के सामने बौना साबित हो रहा है।
भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने 1992 में अधिसूचना जारी कर इन्हें संरक्षित क्षेत्र घोषित किया था। प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक अवशेष अधिनियम 1959 के उप नियम 32 के तहत लागू कानून के आधार पर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसमें तीन साल का कारावास और पांच हजार तक का जुर्माना हो सकता है, लेकिन कानून का पालन अफसर नहीं करा रहे हैं। यही कारण है कि जवाहरपुरी स्थित इकलास खां और मीरा सराय स्थित मखदूनजहां के मकबरे से सटकर तमाम लोगों ने मकान बना लिए हैं। कुछ का निर्माण चल भी रहा है। जबकि चेतावनी बोर्ड भी लगे हैं।
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ऐतिहासिक भवनों के पास अतिक्रमण हटाने के आदेश पुरातत्व विभाग के नहीं मिले हैं। जिन लोगों की अपनी जमीन है वह तो निर्माण करेंगे ही, लेकिन अवैध निर्माण नहीं होने देंगे। बने कानून का भी पालन किया जाएगा।
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- जमीर आलम, सिटी मजिस्ट्रेट