{"_id":"1-41487","slug":"Badaun-41487-119","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंजन बना पिता की मौत का कारण"}
इंजन बना पिता की मौत का कारण
Badaun
Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
बदायूं। नरेश को क्या पता था कि शनिवार की रात वह अपने खेत से पानी का इंजन नहीं बल्कि पिता गजराम का काल लेकर आ रहा है। बीच रास्ते में इंजन खराब हुआ और आरोपी हेमसिंह ने उसे ट्रैक्टर से टक्कर मारकर गिरा दिया। इसके दूसरे दिन दोनों पक्षों में संघर्ष हुआ और गजराम की जान चली गई। इस घटना के बाद से गांव में सन्नाटा पसर गया है, पुलिस की चहलकदमी से सहमे ग्रामीण अपने घरों में दुबके हुए हैं।
सारा गांव बना रहा मूकदर्शक
पूरे गांव के सामने एक घर में आग लगा दी गई और घर में सो रहा वृद्ध जिंदा जल गया। लगभग दो हजार की आबादी वाला पूरा गांव बुत बना यह नजारा देखता रहा लेकिन किसी ने हमलावरों को रोकने की हिम्मत नहीं जुटाई। इसकी वजह यह है कि भले ही सुलेखा देवी गांव की प्रधान हैं लेकिन वहां दबंगई हेमसिंह की चलती है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी कई बार हेमसिंह गांव में उत्पात मचा चुका है लेकिन कोई उसका विरोध करने का साहस नहीं जुटा सका।
आखिरी नींद बनी गजराम की
जिस समय गजराम के पुत्र नरेश और पप्पू का हेमसिंह पक्ष से झगड़ा चल रहा था, उस वक्त वृद्ध गजराम घर में सो रहे थे। उन्हें इसका आभास भी नहीं था कि घर के बाहर का मंजर खौफनाक होता जा रहा है। गजराम अपने जीवन की आखिरी नींद ले रहे थे। कुछ देर बाद घर में आग लगी और जलता हुआ छप्पर उनके ऊपर आ गिरा।
विज्ञापन
जल गए हजारों के कपड़े-नगदी भी
चंद्रवती ने पुलिस को बताया कि आग से उनके घर में रखे लगभग 15 क्विंटल गेहूं के अलावा कुछ नगदी और कपड़े, बर्तन और जरूरी सामान जला है। बकौल चंद्रवती आग से लगभग ढाई लाख रुपये की क्षति हुई है।
विज्ञापन
सारा गांव बना रहा मूकदर्शक
पूरे गांव के सामने एक घर में आग लगा दी गई और घर में सो रहा वृद्ध जिंदा जल गया। लगभग दो हजार की आबादी वाला पूरा गांव बुत बना यह नजारा देखता रहा लेकिन किसी ने हमलावरों को रोकने की हिम्मत नहीं जुटाई। इसकी वजह यह है कि भले ही सुलेखा देवी गांव की प्रधान हैं लेकिन वहां दबंगई हेमसिंह की चलती है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी कई बार हेमसिंह गांव में उत्पात मचा चुका है लेकिन कोई उसका विरोध करने का साहस नहीं जुटा सका।
विज्ञापन
आखिरी नींद बनी गजराम की
जिस समय गजराम के पुत्र नरेश और पप्पू का हेमसिंह पक्ष से झगड़ा चल रहा था, उस वक्त वृद्ध गजराम घर में सो रहे थे। उन्हें इसका आभास भी नहीं था कि घर के बाहर का मंजर खौफनाक होता जा रहा है। गजराम अपने जीवन की आखिरी नींद ले रहे थे। कुछ देर बाद घर में आग लगी और जलता हुआ छप्पर उनके ऊपर आ गिरा।
विज्ञापन
जल गए हजारों के कपड़े-नगदी भी
चंद्रवती ने पुलिस को बताया कि आग से उनके घर में रखे लगभग 15 क्विंटल गेहूं के अलावा कुछ नगदी और कपड़े, बर्तन और जरूरी सामान जला है। बकौल चंद्रवती आग से लगभग ढाई लाख रुपये की क्षति हुई है।