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Ukraine: यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने विशेष न्यायाधिकरण को दी मंजूरी, रूसी नेताओं पर चल सकेगा मुकदमा

Thu, 26 Jun 2025 03:25 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कीव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कीव Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 26 Jun 2025 03:25 PM IST
सार

यूक्रेन लंबे समय से विशेष अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की मांग कर रहा था, ताकि रूसी अधिकारियों और नेताओं को युद्ध अपराध जैसे नागरिक ठिकानों पर हमले, आम नागरिकों की हत्या, दुष्कर्म, लोगों का अपहरण करके उन्हें प्रताड़ित करने आदि के लिए दंडित किया जा सके।

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Zelenskyy approves special tribunal to prosecute Russian leaders over Ukraine
वोलोदिमीर जेलेंस्की, यूक्रेन के राष्ट्रपति - फोटो : X @ZelenskyyUa

विस्तार

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के शीर्ष अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए नए अंतरराष्ट्रीय कोर्ट को गठित करने की योजना को मंजूरी दे दी है। इस नई अदालत में रूसी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा यूक्रेन पर हमले के आरोप में चलाया जाएगा। यूक्रेन और यूरोपीय परिषद के बीच समझौते के तहत विशेष न्यायाधिकरण का गठन किया जाएगा। 
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क्यों पड़ी नई अंतरराष्ट्रीय अदालत की जरूरत
नई अंतरराष्ट्रीय अदालत के गठन का उद्देश्य यूक्रेन के खिलाफ आक्रमण के लिए रूसी नेताओं और अधिकारियों को सजा देना है। यूक्रेन का आरोप है कि रूसी सेना ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमले के बाद से अनगिनत युद्ध अपराध किए हैं। अभी जो अंतरराष्ट्रीय अदालतें मौजूद हैं जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय को रूसी नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं है। यूक्रेन लंबे समय से विशेष अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की मांग कर रहा था, ताकि रूसी अधिकारियों और नेताओं को युद्ध अपराध जैसे नागरिक ठिकानों पर हमले, आम नागरिकों की हत्या, दुष्कर्म, लोगों का अपहरण करके उन्हें प्रताड़ित करने आदि के लिए दंडित किया जा सके। हालांकि रूस इन आरोपों से इनकार करता है। 
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अभी भी बहुत कुछ तय किया जाना बाकी
हालांकि नया अंतरराष्ट्रीय न्यायालय कहां बनेगा और कैसे काम करेगा, इस पर अभी भी फैसला किया जाना बाकी है। हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय जैसा ही नए कोर्ट का भी कानूनी ढांचा हो सकता है, लेकिन अभी कुछ भी तय नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत राष्ट्राध्यक्ष औऱ शीर्ष नेताओं को अक्सर मुकदमे से सुरक्षा मिलती है। इस नई अंतरराष्ट्रीय अदालत को नीदरलैंड्स, जापान, कनाडा जैसे देशों से फंडिंग मिलेगी। अमेरिका ने जो बाइडन के नेतृत्व में इसे समर्थन दिया था, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से इस प्रोजेक्ट का समर्थन नहीं किया जा रहा है। 


 
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