Yuan Vs Dollar: क्या सचमुच दुनिया में डॉलर के वर्चस्व को तोड़ने में सफल हो जाएगा चीन?
युवान का अंतरराष्ट्रीय कारोबार में उपयोग बढ़े, चीन इस प्रयास में लंबे समय से जुटा हुआ था। लेकिन हाल तक उसे इस मामले में ज्यादा कामयाबी नहीं मिली थी। इसका कारण डॉलर का दुनिया भर में प्रचलन और इसके जरिए कारोबार में आसानी थी...
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अमेरिका में कर्ज सीमा संकट और बैंकिंग संकट के कारण अमेरिकी मुद्रा डॉलर की स्थिरता को लेकर बढ़ रहे अंदेशों के बीच चीन ने अपनी मुद्रा युवान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनाने की कोशिशों में पूरी ताकत झोंक दी है। इस बारे में अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है। इसमें इस बात का जिक्र है कि किस तरह हाल में अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे बड़े लैटिन अमेरिकी देशों ने चीन के साथ अपने कारोबार का सारा भुगतान युवान में करने का करार किया है।
अर्जेंटीना में घरेलू उपयोग के उपकरणों की खुदरा बिक्री करने वाली सबसे बड़ी कंपनी न्यूसैन फ्रीज, टीवी आदि जैसे उत्पादों का चीन से आयात करके अपने देश में ब्रिक्री करती है। कुछ समय पहले तक वह इन तमाम वस्तुओं के लिए भुगतान डॉलर में करती थी। लेकिन अब उसने सारा भुगतान युवान में करना शुरू कर दिया है। इस कंपनी के सीईओ लुइस गैली ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा- ‘युवान तेजी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार की मुद्रा बनता जा रहा है। कमजोर देश विकल्पों के बीच चुनाव करने की स्थिति में नहीं होते हैँ। हमें मजबूरी में यह करार करना पड़ा।’
अर्जेंटीना की सरकार ने चीन के करेंसी स्वैपिंग (मुद्राओं की अदला-बदली) का समझौता भी किया है। इसके तहत अर्जेंटीना की कंपनियों के लिए चीन से ऋण के रूप में युवान हासिल करना संभव हो गया है। इस रूप में हासिल युवान से वे अपने आयात का भुगतान कर रही हैं।
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक युवान का अंतरराष्ट्रीय कारोबार में उपयोग बढ़े, चीन इस प्रयास में लंबे समय से जुटा हुआ था। लेकिन हाल तक उसे इस मामले में ज्यादा कामयाबी नहीं मिली थी। इसका कारण डॉलर का दुनिया भर में प्रचलन और इसके जरिए कारोबार में आसानी थी। लेकिन अमेरिका में गहराते आर्थिक संकट और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों ने सूरत बदल दी है। इससे दुनिया में युवान की मांग बढ़ गई है।
पिछले महीने ब्राजील सरकार ने एलान किया कि अब वहां की कंपनियां अपने कारोबार का भुगतान युवान में कर सकती हैं। इस वर्ष मार्च में फ्रांस की ऊर्जा कंपनी टोटल एनर्जी ने चीन को किए 65 हजार टन एलएनजी गैस के निर्यात के बदले भुगतान युवान में स्वीकार किया। इसके कुछ हफ्ते पहले ही मास्को स्टॉक एक्सचेंज में युवान सर्वाधिक खरीद-बिक्री वाली मुद्रा बन गया।
इसके बावजूद अर्थशास्त्रियों का मानना है कि निकट भविष्य में युवान डॉलर की जगह ले ले, ऐसी संभावना नहीं है। ऐसा तभी हो सकेगा, जब विभिन्न देश सिर्फ चीन के साथ कारोबार में नहीं, बल्कि आपसी द्विपक्षीय कारोबार में भी बड़े पैमाने भुगतान सेटलमेंट युवान में करने लगेंगे। ऐसा होने के अभी कोई संकेत नहीं हैं।
इसके बावजूद अभी जो ट्रेंड दिखा है, अगर यह जारी रहा, तो देर-सबेर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का चीन को विश्व व्यापार में केंद्रीय स्थान दिलवाने का सपना पूरा हो सकता है। अमेरिका के पूर्व खुफिया अधिकारी और थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में फेलॉ गेरार्ड डिपिप्पो ने कहा है- ‘दुनिया में चीन को नए गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेता मानने के बढ़ रहे चलन का फायदा चीन सरकार उठा रही है।’
विश्लेषकों के मुताबिक इस कोशिश से विश्व अर्थव्यवस्था में अभी तक कोई नाटकीय बदलाव नहीं आया है। जिन देशों ने युवान को अपनाया है, ऐसा उन्होंने अपनी मजबूरियों के कारण किया है। मसलन, अर्जेंटीना ने ऐसा विदेशी मुद्रा के संकट से राहत पाने के लिए ऐसा किया है।