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मक्का समझौते पर सवाल: हूती लड़ाकों की पाकिस्तान-तुर्किये को धमकी- सऊदी अरब का साथ दिया तो अंजाम भुगतना होगा
Sun, 20 Sep 2026 08:56 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सना
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 20 Sep 2026 08:56 AM IST
सार
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के साथ संभावित सैन्य सहयोग को लेकर पाकिस्तान और तुर्किये को चेतावनी दी है। यह बयान मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बाद सऊदी अरब पर बढ़ते हूती हमलों के बीच आया है। समझौते में तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा का प्रावधान किया है।
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हूती विद्रोहियों की पाकिस्तान और तुर्किये को सीधी चेतावनी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यमन के हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तान और तुर्किये को सीधी चेतावनी दी है। हूतियों ने कहा है कि अगर इन दोनों देशों ने यमन में सऊदी अरब के साथ मिलकर कोई सैन्य दखल दिया, तो उन्हें इसका कड़ा जवाब मिलेगा। यह चेतावनी सऊदी अरब पर हूतियों के नए हमलों के बीच सामने आई है। हूती (अंसार अल्लाह) के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और धमार के गवर्नर मोहम्मद अल-बुखैती ने एक इराकी टीवी कार्यक्रम 'अनदर रीडिंग' में यह बात कही। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान और तुर्किये इसमें शामिल होते हैं, तो वे उन पर पूरी ताकत से वार करेंगे और दोनों देशों को ऐसा सबक सिखाएंगे जिसे वे याद रखेंगे।
हूती विद्रोहियों क्या कहा?
अल-बुखैती ने यह भी माना कि पाकिस्तान और तुर्किये की आम जनता के दिलों में यमन के लिए गहरी हमदर्दी है। उन्होंने साफ किया कि उनकी यह चेतावनी वहां के लोगों के लिए नहीं, बल्कि दोनों देशों की सरकारों के लिए है। अगर वे सैन्य रूप से सऊदी अरब का साथ देती हैं। हूतियों की इस धमकी के बाद 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' की चर्चा तेज हो गई है। तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने इसी साल सात अगस्त को इस रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसका मकसद बढ़ती क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच साझी जिम्मेदारी और सुरक्षा को मजबूत करना है। समझौते की शर्त के मुताबिक, किसी भी एक सदस्य देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।
मामले पर तुर्किये ने क्या कहा?
हालांकि इस बीच तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने सऊदी अरब की संप्रभुता पर मंडराते खतरे को लेकर एकजुटता जताई है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब को सैन्य स्तर के सहयोग की जरूरत पड़ सकती है। मक्का गठबंधन के तहत वे पाकिस्तान से बातचीत करेंगे और जरूरी तकनीकी सहायता उपलब्ध करा सकते हैं। फिदान ने मक्का के पास तेल ठिकानों पर हुए हमलों की भी कड़ी निंदा भी की है।
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ये भी पढ़ें: 'अमेरिका जो आरोप लगा रहा, उसकी शुरुआत उसने खुद की': यूएनजीए की बैठक से पहले अमेरिकी आरोपों पर तेहरान का पलटवार
यमन में यह युद्ध 2014 से चल रहा है, जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दखल दिया था। इस साल जुलाई से हूतियों ने रियाद पर समुद्री नाकेबंदी का एलान किया है और लाल सागर तट व बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में बढ़त बनाने का दावा किया है। हूतियों ने सऊदी अरब के तेल ठिकानों को भी निशाना बनाया है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मामले पर पाकिस्तान का क्या है कहना?
पाकिस्तान ने शुरू से ही सऊदी अरब पर हमलों का विरोध किया है और इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में भी उठाया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि मक्का और मदीना की रक्षा करना उनके लिए 'शाश्वत समझौता' और धार्मिक फर्ज है। उन्होंने कहा कि पवित्र स्थानों की सुरक्षा किसी भी कागजी समझौते से बढ़कर है।
वहीं पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा (आईएसपीआर) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भी सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान के 'बिना शर्त' समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान किसी भी हद तक जाने को तैयार है और उन्हें कोई भी कदम उठाने से नहीं रोक सकता। हालांकि पाकिस्तान और तुर्किये के इन दोवों का असर अभी तक जमीन पर देखने को नहीं मिला है।
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हूती विद्रोहियों क्या कहा?
अल-बुखैती ने यह भी माना कि पाकिस्तान और तुर्किये की आम जनता के दिलों में यमन के लिए गहरी हमदर्दी है। उन्होंने साफ किया कि उनकी यह चेतावनी वहां के लोगों के लिए नहीं, बल्कि दोनों देशों की सरकारों के लिए है। अगर वे सैन्य रूप से सऊदी अरब का साथ देती हैं। हूतियों की इस धमकी के बाद 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' की चर्चा तेज हो गई है। तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने इसी साल सात अगस्त को इस रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसका मकसद बढ़ती क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच साझी जिम्मेदारी और सुरक्षा को मजबूत करना है। समझौते की शर्त के मुताबिक, किसी भी एक सदस्य देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।
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मामले पर तुर्किये ने क्या कहा?
हालांकि इस बीच तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने सऊदी अरब की संप्रभुता पर मंडराते खतरे को लेकर एकजुटता जताई है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब को सैन्य स्तर के सहयोग की जरूरत पड़ सकती है। मक्का गठबंधन के तहत वे पाकिस्तान से बातचीत करेंगे और जरूरी तकनीकी सहायता उपलब्ध करा सकते हैं। फिदान ने मक्का के पास तेल ठिकानों पर हुए हमलों की भी कड़ी निंदा भी की है।
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यमन में यह युद्ध 2014 से चल रहा है, जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दखल दिया था। इस साल जुलाई से हूतियों ने रियाद पर समुद्री नाकेबंदी का एलान किया है और लाल सागर तट व बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में बढ़त बनाने का दावा किया है। हूतियों ने सऊदी अरब के तेल ठिकानों को भी निशाना बनाया है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मामले पर पाकिस्तान का क्या है कहना?
पाकिस्तान ने शुरू से ही सऊदी अरब पर हमलों का विरोध किया है और इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में भी उठाया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि मक्का और मदीना की रक्षा करना उनके लिए 'शाश्वत समझौता' और धार्मिक फर्ज है। उन्होंने कहा कि पवित्र स्थानों की सुरक्षा किसी भी कागजी समझौते से बढ़कर है।
वहीं पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा (आईएसपीआर) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भी सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान के 'बिना शर्त' समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान किसी भी हद तक जाने को तैयार है और उन्हें कोई भी कदम उठाने से नहीं रोक सकता। हालांकि पाकिस्तान और तुर्किये के इन दोवों का असर अभी तक जमीन पर देखने को नहीं मिला है।