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China-USA: जिनपिंग ने BRI में शामिल होने के लिए बाइडन को दिया न्योता; IMEEC को लेकर भी दिए ये संकेत

Thu, 16 Nov 2023 08:47 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 16 Nov 2023 08:47 PM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग की करीब एक साल बाद बुधवार को पहली बार आमने-सामने मुलाकात हुई थी। एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं यह मुलाकात करीब चार घंटे तक चली।

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Xi invites Biden to join BRI in summit talks, says ready to join US' multilateral initiatives
जो बाइडन- शी जिनपिंग मुलाकात - फोटो : ANI

विस्तार

चीन पूरी दुनिया में अपना आर्थिक प्रभाव जमाने की कोशिशों में जुटा है और इस लक्ष्य को पाने के लिए उसने एक खरब डॉलर की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव परियोजना (बीआरआई) की शुरुआत की थी, जिसमें कई देशों में चीन विकास परियोजनाओं का निर्माण करने वाला है। अब इसी परियोजना में शामिल होने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने अमेरिकी समकक्ष जो बाइडन को आमंत्रित किया है। इसके साथ ही उन्होंने बिना भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEEC) का नाम लिए कहा कि चीन अमेरिका की प्रस्तावित बहुपक्षीय सहयोग पहल में भी भाग लेने के लिए तैयार है।

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दोनों ने एक-दूसरे के साथ बिताए चार घंटे
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग की करीब एक साल बाद बुधवार को पहली बार आमने-सामने मुलाकात हुई थी। एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं यह मुलाकात करीब चार घंटे तक चली। इसमें शी जिनपिंग ने सीधे तौर पर IMEEC का उल्लेख नहीं किया, लेकिन कहा कि चीन अमेरिका की प्रस्तावित बहुपक्षीय सहयोग पहल में भी भाग लेने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि इस बैठक को चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने रणनीतिक और ऐतिहासिक बताया है। हालांकि दोनों वैश्विक नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं।  
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एक दूसरे से  मुंह मोड़ना कोई विकल्प नहीं
मुलाकात के दौरान शी ने बाइडन से कहा कि अमेरिका और चीन को मतभेदों से ऊपर उठने में पूरी तरह सक्षम होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चीन और अमेरिका जैसे बड़े देशों के लिए एक-दूसरे से मुंह मोड़ना कोई विकल्प नहीं है। 
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विदेश मंत्री वांग  ने कहा कि दोनों राष्ट्रपतियों ने आमने-सामने विचारों का गहन आदान-प्रदान किया। उन्होंने चीन-अमेरिका संबंधों के सामने आने वाले सबसे स्पष्ट मुद्दों पर मार्गदर्शन करने वाले विचार पेश किए। इसमें एक-दूसरे के बारे में सही धारणा अपनाना, मतभेदों को उचित रूप से प्रबंधित करना और बातचीत और सहयोग को आगे बढ़ाना शामिल है। वांग ने कहा कि इसके अलावा, वार्ता के दौरान फिलिस्तीनी-इजरायल संघर्ष, यूक्रेन संकट, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य वैश्विक चुनौतियों से निपटने के तरीकों पर चर्चा हुई।

 अमेरिका-चीन के शीर्ष नेताओं ने ताइवान मुद्दे पर बातचीत की 
अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडन और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच ताइवान के मुद्दों पर बातचीत हुई। चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा, संयुक्त राज्य अमेरिका को ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन न करने की अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करने के लिए वास्तविक कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं बाइडन ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराई है। जनवरी में ताइवान के आगामी मतदान के संबंध में अमेरिका ने अनुरोध किया कि चीन द्वीप की चुनावी प्रक्रिया का सम्मान करे। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा, राष्ट्रपति जिनपिंग और मेरे बीच कई क्षेत्रीय, वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

क्या है बीआरआई परियोजना
बेल्ट एंड रोड परियोजना की परिकल्पना साल 2013 में की गई थी और यह परियोजना चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिमाग की उपज  मानी जाती है। इस परियोजना के तहत चीन, एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच जमीनी, समुद्री कनेक्टिविटी बना रहा है, जिसके लिए दुनिया के विभिन्न देशों में रेल, सड़क और जल मार्ग बनाए जा रहे हैं। चीन की इस पहल की अमेरिका, भारत और अन्य देशों द्वारा व्यापक रूप से आलोचना की गई है। वहीं, श्रीलंका और पाकिस्तान सहित कई देश इसके सबसे बड़े लाभार्थी हैं। वहीं, अमेरिका, भारत और यूरोपीय संघ के कई देश बीआरआई का हिस्सा नहीं हैं।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2018 में चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव परियोजना अपने चरम पर थी लेकिन अब इसमें 40 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। चीन के बढ़ते  कर्ज के जाल से भी कई देश आशंकित हो गए हैं।  

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