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Service Sector: डब्ल्यूटीओ के 70 से अधिक देश सेवा क्षेत्र में अतिरिक्त दायित्व संभालेंगे, भारत को बड़ा लाभ
Wed, 28 Feb 2024 01:52 AM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 28 Feb 2024 01:52 AM IST
सार
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 70 से अधिक देश सर्विस सेक्टर यानी सेवा क्षेत्र में अतिरिक्त दायित्व उठाने को तैयार हैं। डब्ल्यूटीओ के इन सदस्य देशों के ऐसा करने पर भारत को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।
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WTO
- फोटो : twitter: @wto
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विस्तार
ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया जैसे 70 से अधिक देशों ने विश्व व्यापार संगठन के तहत अतिरिक्त दायित्व संभालने की पहल की है। इन देशों ने सेवा क्षेत्र में डब्ल्यूटीओ के तहत समझौता किया है। इस वैश्विक संगठन के एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि 70 से अधिक देशों की इस पहल से भारत को बड़ा लाभ मिलने वाला है। खबर के मुताबिक WTO के सदस्य देशों ने आपस में गैर-वस्तुओं के व्यापार को आसान बनाने की तरफ कदम बढ़ाए हैं।
इस समझौते के तहत डब्ल्यूटीओ के अन्य सभी सदस्यों को समान रियायतें दी जाएंगी। रियायत के लिए सेवाओं में सामान पर सामान्य समझौते (जीएटीएस) किए जाएंगे। 70 से अधिक देशों ने यह अतिरिक्त दायित्व लेने पर स्वेच्छा से सहमति दी है। डब्ल्यूटीओ अधिकारी के मुताबिक जीएटीएस में देशों के शेड्यूल के तहत जो अतिरिक्त दायित्व उठाने का फैसला लिया गया है, इसमें लाइसेंसिंग जरूरतों और प्रक्रियाओं को कम करना सबसे अहम है। सहमति जताने वाले सभी देश योग्यता, जरूरत और प्रक्रियाओं और तकनीकी मानकों से संबंधित अनपेक्षित व्यापार प्रतिबंध के साथ-साथ प्रभाव या उपाय भी कम करना चाहते हैं।
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इस समझौते के तहत डब्ल्यूटीओ के अन्य सभी सदस्यों को समान रियायतें दी जाएंगी। रियायत के लिए सेवाओं में सामान पर सामान्य समझौते (जीएटीएस) किए जाएंगे। 70 से अधिक देशों ने यह अतिरिक्त दायित्व लेने पर स्वेच्छा से सहमति दी है। डब्ल्यूटीओ अधिकारी के मुताबिक जीएटीएस में देशों के शेड्यूल के तहत जो अतिरिक्त दायित्व उठाने का फैसला लिया गया है, इसमें लाइसेंसिंग जरूरतों और प्रक्रियाओं को कम करना सबसे अहम है। सहमति जताने वाले सभी देश योग्यता, जरूरत और प्रक्रियाओं और तकनीकी मानकों से संबंधित अनपेक्षित व्यापार प्रतिबंध के साथ-साथ प्रभाव या उपाय भी कम करना चाहते हैं।
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