दुनिया घूमकर लौटा द्वितीय विश्व युद्ध का लड़ाकू विमान
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द्वितीय विश्वयुद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले आइकनिक स्पिटफायर लड़ाकू विमान ने पहले ही प्रयास में दुनिया का चक्कर लगाने में सफलता हासिल कर ली। अपने ऐतिहासिक सफर में करीब 24 देशों का चक्कर लगाते हुए 37,500 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद इस 76 साल पुराने लड़ाकू विमान ने गुरुवार को ब्रिटेन में सफलतापूर्वक वापसी कर ली।
चांदी के रंग से चमचमाते इस विमान ने 5 अगस्त को उड़ान भरने के ठीक चार महीने बाद 5 दिसंबर को चिचेस्टर के बाहरी इलाके में गुडवुड हवाई पट्टी के घसियाले रनवे पर लैंडिंग करते ही इतिहास कायम कर लिया।
इस लड़ाकू विमान को यात्रा पर रवाना किए जाने से पहले मरम्मतीकरण के जरिये नया रूप-रंग दिया गया था। इस दौरान विमान का असैन्यीकरण किया गया। इसकी बंदूक हटाने के बाद पेंट किया गया। साथ ही चांदी व एल्युमीनियम की मदद इसे चमकदार बनाया गया था।
ब्रिटिश पायलट मैट जोन्स (46) और स्टीव ब्रुक्स (58) ने करीब 74 चरणों के इस यात्रा के दौरान विमान को उड़ाने की जिम्मेदारी संभाली। इसे अब तक का सबसे लंबा उड़ान अभियान बताया जा रहा है। इस दौरान विमान ने जहां न्यूयॉर्क में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के ऊपर से उड़ान भरी, वहीं मिस्र के पिरामिडों के भी दर्शन किए।
स्मॉग के कारण दिल्ली को कर दिया बाईपास
अपने अभियान के दौरान सिल्वर स्पिटफायर विमान ने अपने सफर में अमेरिका, कनाडा, अलास्का, रूस, जापान, ताइवान, हांगकांग, वियतनाम, थाईलैंड, म्यांमार और भारत के नजारे देखे।
हालांकि इस दौरान विमान को वायु प्रदूषण से बन गए स्मॉग के चलते कम दृश्यता की परिस्थिति के कारण भारतीय राजधानी दिल्ली को बाईपास करते हुए उड़ान भरनी पड़ी। इसके बाद विमान ने पाकिस्तान, यूएई, बहरीन से होते हुए सऊदी अरब के रेगिस्तान के ऊपर से उड़ान भरते हुए 830 किलोमीटर का अपना सबसे लंबा चरण पूरा किया।
इस दौरान विमान ने कुवैत से साढ़े तीन घंटे में जॉर्डन के अकाबा शहर तक की दूरी तय की।
म्यूजियम से निकालकर लाया गया था विमान
द्वितीय विश्व युद्ध से पहले करीब 20000 स्पिटफायर विमान बनाए गए थे, जिनमें महज 250 ही शेष बचे थे। इनमें भी 50 को ही उड़ान भरने लायक माना गया था।
विश्व का चक्कर लगाने वाले विमान को 1943 में ब्रिटेन में बनाया गया था और उसने द्वितीय विश्व युद्ध में करीब 51 अभियानों में हिस्सेदारी की थी। 2017 में इसका जीर्णोद्धार शुरू किए जाने से पहले यह विमान करीब 70 साल तक नीदरलैंड के एक म्यूजियम में दर्शकों के लिए खड़ा रहा था।
करीब दो साल लंबे जीर्णोद्धार में इस विमान के 80 हजार पुर्जों की जांच, सफाई और आवश्यक मरम्मतीकरण का काम पूरा किया गया था।