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अफगानिस्तान संकट: 'खत्म हुआ अमेरिका का सबसे लंबा युद्ध...' जानिए क्या कहता है दुनिया का मीडिया
Mon, 16 Aug 2021 08:55 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 16 Aug 2021 08:55 PM IST
सार
रविवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान के दाखिले के साथ वहां के हालात तेजी से बदले हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
तालिबान ने 20 साल के बाद अफगानिस्तान की सत्ता पर फिर कब्जा जमा लिया है। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़ कर जा चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। इस रिपोर्ट में पढ़िए इस मामले को वैश्विक मीडिया ने किस तरह कवर किया....
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भागने की जद्दोजेहद के बीच काबुल एयरपोर्ट पर खूनी भगदड़: वाशिंगटन पोस्ट
वाशिंगटन पोस्ट ने इस पूरे वाकये को लेकर लिखा कि काबुल एयरपोर्ट पर बने हालात के चलते कुछ लोगों की मौत हो गई। राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर अपना रुख बरकरार रखा है। इसने बाइडन के हवाले से लिखा, 'एक और साल या पांच और साल, अमेरिकी सेना की मौजूदगी अफगानिस्तान के हालात नहीं सुधार सकती अगर अफगानिस्तान की सेना अपना खुद का देश नहीं बचा सकती। किसी देश के अंदरूनी विवाद में लगातार जारी अमेरिका की मौजूदगी मुझे स्वीकार्य नहीं है।'
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अमेरिका का सबसे बड़ा युद्ध, अफगानिस्तान में अमेरिका का अंत: सीएनएन
सीएनएन ने इस पूरे घटनाक्रम को अफगानिस्तान में अमेरिका का अंत बताया है। इसने लिखा कि अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता संभालने के बाद काबुल में हालात बिगड़ गए। वहीं, इस पूरे मामले पर चीन को लेकर इसने लिखा चीन के लिए तालिबान की अफगानिस्तान में वापसी अवसरों से ज्यादा खतरे ला सकती है। सीएनएन ने काबुल एयरपोर्ट पर विमान के सामने भागती भीड़ के वीडियो को खास तौर से उल्लेखित किया।
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तालिबान से बचने के लिए भागने की कोशिश में काबुल एयरपोर्ट पर भीड़: गार्जियन
गार्जियन ने काबुल में बने हालात को प्रमुखता से पेश किया है। इसके अलावा देश छोड़ कर भागने वाले पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी को इसने ऐसा 'बुद्धिजीवी' बताया है जिसके पास तालिबान का कोई जवाब नहीं है। इसके अलावा इसने लिखा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान में अमेरिकी मिशन का बचाव किया है। ब्रिटेन के रक्षा सचिवालय के हवाले से इसने लिखा है कि नाटो अफगानिस्तान में वापसी करने वाला नहीं है।
'क्राइसिस प्वाइंट' बना काबुल एयरपोर्ट, भागने की फिराक में अफगानी: अल जजीरा
अल जजीरा ने अफगानिस्तान में घटनाक्रम को 'अमेरिका, तालिबान और अमेरिका की करारी हार' के एंगल से देखा है। तालिबान की जीत को अमेरिका के लिए बेहद अपमानजनक बताया गया है और इसे अफगान संघर्ष के लिए 'सिल्वर लाइन' की तरह करार दिया गया है। अशरफ गनी के देश छोड़ने की घटना को लेकर कहा है कि ऐसी उम्मीद थी लेकिन वह इतनी जल्दी करेंगे इसकी आशा नहीं थी।
काबुल एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी, तालिबान के डर से भाग रहे लोग: बीबीसी
बीबीसी ने लिखा है कि करीब 20 साल सत्ता से बाहर रहने के बाद एक बार फिर इस्लामी समूह तालिबान ने प्रभावी रूप से नियंत्रण हालिस कर लिया है। वहीं, इसने लिखा है कि काबुल के पतन के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का विरोध भी तेज हुआ है। तालिबान ने बिना किसी विरोध के काबुल में प्रवेश किया और राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया।
तालिबान के नियंत्रण संभालने के साथ अफगानिस्तान में हालात बिगड़े: वॉलस्ट्रीट जर्नल
वॉलस्ट्रीट जर्नल ने इस पूरे घटनाक्रम को बड़ा झटका बताया है। इसने अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन को नाटकीय घटनाक्रम करार दिया है। इसके अलावा इसने एक रिपोर्ट में लिखा है कि अमेरिका के वो सैनिक जो लंबे समय तक अफगानिस्तान में तैनात रहे वह अब सोच रहे हैं कि उन्होंने जो किया उसका कोई मूल्य नहीं रह गया? अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान में दखलअंदाजी न करने का साफ संकेत दिया है।