फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   World Many countries facing debt, USA, Japan, China top lender

चिंता: दुनिया दबती जा रही है कर्ज के बोझ तले, इन तीन बड़े देशों पर सबसे अधिक कर्ज

Tue, 12 Apr 2022 01:27 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 12 Apr 2022 01:27 PM IST
सार

दो साल पहले कोरोना महामारी आने के बाद से ही अलग- अलग देशों की सरकारों ने असामान्य रूप से कर्ज लेना शुरू किया।

विज्ञापन
World Many countries facing debt, USA, Japan, China top lender
कर्ज के बोझ के तले दबे दुनिया के बड़े देश

विस्तार

दुनिया भर की सरकारों पर मौजूद कर्ज में इस साल 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। इससे ये कर्ज 71.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। इस समय सबसे ज्यादा कर्ज अमेरिका, जापान और चीन की सरकारों पर चढ़ रहा है। ये बात ब्रिटिश असेट मैनेजर कंपनी जेनस हेंडरसन ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में कही है। ये रिपोर्ट पिछले हफ्ते प्रकाशित हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि दो साल पहले कोरोना महामारी आने के बाद से ही अलग- अलग देशों की सरकारों ने असामान्य रूप से कर्ज लेना शुरू किया। उनमें बहुत से देशों ने इसलिए कर्ज लिया, क्योंकि वे महामारी के दौरान अपनी जनता को राहत पहुंचाना चाहते थे। जबकि कई देशों ने अर्थव्यवस्था के ठप हो जाने के कारण राजकाज चलाने के लिए कर्ज लिया।

विज्ञापन


जेनस हेंडरसन की रिपोर्ट में जो आंकड़े दिए गए हैं, उनके मुताबिक पिछले साल प्रतिशत के लिहाज से सबसे ज्यादा कर्ज चीन सरकार ने लिया। उसने 65 बिलियन डॉलर कर्ज लिया। इसका मतलब यह है कि चीन सरकार पर जितना कर्ज मौजूद है, उसका 20 फीसदी हिस्सा उसने सिर्फ पिछले साल ही लिया। पश्चिमी देशों में एक साल में सबसे अधिक कर्ज लेने वाला देश जर्मनी है। उसके कर्ज में पिछले साल 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वैसे दुनिया भर में कर्ज बढ़ोतरी का औसत लगभग साढ़े सात फीसदी रहा।
विज्ञापन


जेनस हेंडरसन ने बताया है कि पिछले दो दशकों में दुनिया भर की सरकार पर मौजूद कर्ज बढ़कर तीन गुना हो गया है। पहले इस समस्या पर इसलिए ध्यान नहीं जाता था, क्योंकि ब्याज दरें कम थीं। इसलिए कर्ज की वजह से सरकारों पर अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ता था। लेकिन अब दुनिया भर में ट्रेंड ब्याज दरों में बढ़ोतरी का है। इसलिए आशंका है कि अब सरकारों को मूल धन के साथ-साथ ऊंचा ब्याज भी चुकाना होगा। इससे बहुत से देशों की राजकोषीय सेहत तेजी से बिगड़ सकती है। हेंडरसन की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2022 में ब्याज के बोझ में 14.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। इसका मतलब यह हुआ कि सरकारों को 1.16 ट्रिलयिन डॉलर सिर्फ ब्याज के रूप में चुकाने होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है- ‘विकसित देशों के बीच ब्याज दरें बढ़ने का सबसे बड़ा असर ब्रिटेन पर होगा। बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण भी ब्रिटेन के लिए कर्ज को चुकाना महंगा हो जाएगा।’
विज्ञापन
विज्ञापन


जेनस हेंडरसन में पोर्टफोलियो मैनेजर बेथनी पाइन ने कहा है कि सरकारों के कर्ज पर कोरोना महामारी का बहुत खराब असर हुआ। यह असर अभी कुछ समय तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में अभी जो त्रासद घटनाएं हो रही हैं, उनकी वजह से पश्चिमी देशों को और कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, ताकि वे अपना रक्षा खर्च बढ़ा सकें। जेनस हेंडरसन की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारों पर कर्ज की मौजूदा हालत के कारण लंबी अवधि के बॉन्ड खरीदने में जोखिम बढ़ गया है। लेकिन इस कारण छोटी अवधि वाले बॉन्ड निवेशकों के लिए आकर्षक हो गए हैं। अनुमान लगाया गया है कि फिलहाल निवेशक अल्प अवधि के बॉन्ड्स में ही पैसा लगाने को प्राथमिकता देंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed